पूर्व व्यय सचिव ईएएस सरमा का कहना है कि केजी डी6 बेसिन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस के लिए तय ऊंची कीमत की जांच के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 11 पत्र लिखे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस घोटाले की जांच के लिए उन्होंने सोमवार को ही पत्र लिखा था और उन्होंने मंगलवार को इस पर कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया।
उनका कहना है कि गैस की कीमत अप्रैल, 2014 से 8.4 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू करने का फैसला प्राकृतिक संसाधनों और करदाताओं की गाढ़ी कमाई की खुली लूट है। अमर उजाला के साथ एक बातचीत में ईएएस सरमा ने यह बातें कहीं।
ऐसे तो 3 गुना बढ़ जाएगी महंगाई
सरमा के अलावा तीन और लोगों ने केजरीवाल को पत्र लिखा है। उनमें से एक पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रह्मण्यम ने अमर उजाला को बताया कि हमने दिल्ली सरकार को पत्र इसलिए लिखा क्योंकि केंद्र इस पर चुप है।
उन्होंने कहा कि हमारा कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और न ही किसी कंपनी के हम खिलाफ हैं लेकिन यह फैसला देश की 100 करोड़ से ज्यादा की आबादी के लिए घातक है क्योंकि इससे महंगाई दो से तीन गुना तक बढ़ जाएगी। जिस तरह से टूजी घोटाले और कोल घोटाले के जरिये सार्वजनिक संसाधनों की लूट हुई है उसी तरह से सरकार की मिलीभगत से यह नुकसान हुआ है।
वहीं ईएएस सरमा ने कहा कि 30 जून, 2009 से अब तक मैने प्रधानमंत्री को 11 पत्र लिखे हैं, जिनमें गैस कीमतों में बढ़ोतरी को गलत साबित करने केलिए तमाम तथ्य दिए गए हैं। लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की।
पेट्रोलियम मंत्रालय पर मिलीभगत का आरोप
सरमा द्वारा भेजे गए इन पत्रों की प्रति अमर उजाला के पास है। केजरीवाल को पत्र लिखने की वजह पूछने पर सरमा कहते हैं कि इस मुद्दे पर जो भी व्यक्ति कार्रवाई करने की स्थिति में होगा मैं उसे ही पत्र लिखने के लिए तैयार हूं।
प्रधानमंत्री के अलावा अगस्त, 2013 से अक्तूबर, 2013 के बीच केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) को मैने तीन पत्र लिखे लेकिन उन्होंने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। दिल्ली सरकार द्वारा इस मामले में कार्रवाई करने की क्षमता पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन शेयरिंग एग्रीमेंट दिल्ली में हुआ है इसलिए कॉज ऑफ एक्शन दिल्ली होने के नाते यहां कार्रवाई हो सकती है।
सरमा के मुताबिक गैस की कीमत बढ़ाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गलत तरीके से उत्पादन लागत बढ़ाई है। कैग भी यह मुद्दा उठा चुका है। इसके साथ ही सरकार को रिलायंस इंडस्ट्रीज से 7000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र वापस लेना था लेकिन इस बारे में भी कोई कदम मंत्रालय ने नहीं उठाया है। पूरे मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय की मिलीभगत का आरोप सरमा ने लगाया है।