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केजरीवाल, कांग्रेस और वाड्रा, सच्चा कौन?

Wed, 10 Oct 2012 08:02 AM IST
नोएडा/इंटरनेट डेस्क
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राबर्ट वाड्रा को निशाने पर लेकर सुर्खियों में आए अरविंद केजरीवाल के आरोपों को भले ही हरियाणा सरकार या डीएलएफ के अधिकारी सिरे से खारिज कर रहे हों, लेकिन फिर भी कांग्रेस के भीतर क्या चल रहा है इसे समझ पाना टेढ़ी खीर है। केजरीवाल के आरोपों के बाद जवाब देने की प्रक्रिया में पहला नाम आया पी चिदंबरम का, चिदम्बरम ने कहा कि उनके खिलाफ जांच का कोई सवाल ही नहीं है।
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इसके बाद बयान आया वीरप्पा मोईली का, मोईली ने कहा कि राबर्ट की छह कंपनियों के कागजात सही हैं, उनमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है, इसके बाद प्रवक्ता राशिद अल्वी ने मीडिया के सामने इन सब को केजरीवाल का पब्लिसिटी स्टंट करार दिया और कहा कि केजरीवाल सरकार के पास या अदालत में शिकायत क्यों नहीं करते। 'अगर वे कानून का दरवाजा खटखटाते हैं तो कानून अपना काम करेगा।'

गौर हो कि मंगलवार को केजरीवाल ने हरियाणा सरकार से एक ह्वाइट पेपर की मांग की है, जिससे यह साबित हो सके कि डीएलएफ को फायदा पहुंचाने के लिए हरियाणा सरकार ने क्या-क्या कुर्बानियां दी है। केजरीवाल भी जानते ही होंगे कि गुड़गांव में आज जिस डीएलएफ ने अपना भूसाम्राज्य विकसित किया है, उसकी शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही करवाई थी।
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देलही लैंड एंड फाइनेन्स (डीएलएफ) हाउसिंग एंड कंसट्रक्शन कंपनी दिल्ली में कोलोनाइजर के बतौर काम कर रही थी, लेकिन जब उसने पहली बार दिल्ली से बाहर निकलकर गुड़गांव में एकीकृत कालोनियां विकसित करने का प्रस्ताव किया तो हरियाणा का लैंड यूज आड़े आ रहा था, इसे बदलवाने का काम तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर हरियाणा सरकार ने किया था।

इसके बाद से राजनीतिक तौर पर ऐसा समझा जाता है कि आज एक लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार करने वाली रियल एस्टेट कंपनी वास्तव में कांग्रेस की है, जहां कांग्रेसी जन जब चाहे अपना पूंजी निवेश करके रिटर्न की गारंटी ले सकते हैं। कांग्रेसी कृपा का ही परिणाम है कि 3000 हजार एकड़ (बारह वर्ग किलोमीटर) जमीन के जरिए गुड़गांव में निजी शहर बसाने के सपने के साथ शुरू हुआ उसका सफर आज 42 वर्गकिलोमटर का हो चुका है। डीएलएफ बड़ी शान से इस बात की घोषणा करता है कि उसके पास 42 वर्गकिलोमीटर का लैंड बैंक है, जिसे वह वर्गफुट के लिहाज से निर्मित करके बेचेगा और मुनाफा कमायेगा।

निश्चित तौर पर निर्माण का कारोबार सिर्फ जमीन पा लेने भर से शुरू नहीं होता है। इसके लिए बड़ी मात्रा में पूंजी निवेश की जरूरत होती है। शायद यही कारण है कि देश के हर उस क्षेत्र में राजनीतिक वर्ग निर्माण कार्य में विशेष रुचि दिखाने लगे हैं, जहां विकास की आंधी बह रही है। ऐसे में बिल्डर और नेता का नेक्सस तैयार हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए।
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