आम आदमी पार्टी की सरकार का असर शासन-प्रशासन पर अब दिखना शुरू हो गया है। मुफ्त पानी देने के बाद अब दिल्ली जल बोर्ड ने पानी के टैंकरों पर निगरानी रखने को टास्क फोर्स बनाया है।
टास्क फोर्स को दिल्ली जल बोर्ड की टैंकर सेवाओं के कार्य का निरीक्षण करने और जरूरी कार्यवाही करने का आदेश दिया गया है। साथ ही 6 जनवरी को अपनी रिपोर्ट भी देने का निर्देश दिया गया है।
शनिवार को जल बोर्ड मुख्यालय में हुई वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में बोर्ड के सीईओ विजय कुमार ने कहा कि हमें यह दिखाना होगा कि दिल्ली में रहने वाले उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड प्रयत्नशील है।
पानी की निगरानी के लिए अधिकारियों को आदेश
उन्होंने ने सभी अधिकारियों, मुख्य अभियंताओं, अधिशासी अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे सभी जल वितरण बिंदुओं की निगरानी करें और बारीकी से देख-रेख करें ताकि पानी का टैंकर सही लोगों तक ही पहुंचे ।
उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड को यह भी निर्देश दिया है कि अधिशासी अभियंता व्यक्तिगत रूप से सभी टैंकर सेवाओं पर निगरानी रखें। अधिशासी अभियंता जल सेवा वितरण केंद्र पर जाकर उपभोक्ताओं से पूछताछ कर उनकी प्रतिक्रियाएं लें।
आमतौर पर जल बोर्ड का टैंकर पानी लेकर निकलता है, लेकिन वहां तक नहीं पहुंचता, जहां के लिए उसे भेजा जाता है। कई टैंकर माफिया दिल्ली में सक्रिय हैं। कई बार टैंकरों में पूरा पानी भी नहीं रहता।
आप भी पानी के टैंकर को ट्रैक कर सकेंगे
दिल्ली सरकार ने टैंकर माफियाओं पर लगाम लगाने की पूरी तैयारी कर ली है। निगरानी के लिए एक टास्क फोर्स का तो गठन किया ही गया है साथ साथ ही पारदर्शिता लाने के लिए पानी के टैंकरों की सूची ऑन लाइन भी होगी ताकि लोगों को पता चल सके कि पानी का टैंकर किस इलाके में जाने वाल है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जलबोर्ड के पानी के टैंकरों को माफियाओं से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पानी का टैंकर किस इलाके के लिए निर्धारित किया गया है इसकी जानकारी वेबसाइट पर मौजूद होगी।
वेबसाइट के जरिए होगी निगरानी
इतना ही नहीं ड्राइवर का मोबाइल नंबर भी वेबसाइट पर होगा ताकि इलाके के लोग ड्राइवर को फोन कर उसे ट्रैक कर सके। उन्होंने बताया कि अगर टैंकर नहीं पहुंचता है तो इसकी शिकायत करने के लिए भी एक नंबर जल्द जारी होगा।
इससे पहले दिल्ली वालों को पानी के लिए बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। ऐसे में जलबोर्ड और पानी माफियाओं की घालमेल करके फाइलों में उन्हें पानी उपलब्ध करा दिया जाता है।