गुजरात चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी और कांग्रेस पर बम फोड़ा है। इस बम में मोदी और कांग्रेस पर गुजरात को लूटने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि मोदी ने बिजली उत्पादक कंपनी अदानी का फेवर किया। मोदी ने अदानी से काफी ऊंचे दामों में बिजली खरीदी, जबकि कई सरकारी कंपनियों ने कम दामों में बिजली बेचने का प्रस्ताव दिया था।
केजरीवाल का आरोप है कि भारतीय वायु सेना को जमीन 8800 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से बेची गई। वहीं मोदी ने जो कंपनी अदानी समूह को जमीन एक रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से जमीन बेची। इन रेटों में इतना अंतर क्यों, मोदी के ऐसा करने से यह साफ जाहिर हो रहा है मोदी कहीं न कहीं दोषी हैं। उन्होंने बताया कि मोदी के खिलाफ उन्हें ये सबूत गुजरात के निलंबित पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट ने कुछ माह पहले उपलब्ध कराए थे लेकिन उनकी टीम ने इन सबूतों एवं कागजात की पूरी जांच की। इन सबूतों को उपलब्ध कराने के पीछे भट्ट की क्या मंशा थी।
इसके बारे में वे कुछ नहीं कहना चाहते लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर इन सबूतों की जांच की और पूरी तसल्ली हो जाने के बाद ही इन्हें सार्वजनिक करने का फैसला किया। गौरतलब है कि केजरीवाल इसके पहले यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी और उद्योगपति मुकेश अंबानी को निशाना बना चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने स्विस बैंकों में जमा काले धन के मुद्दे को भी उठाया है। उन्होंने एचएसबीसी बैंक पर आरोप लगाया था कि वह भारत में हवाला को बढ़ावा दे रहा है।
फ्री में दी गईं खदानें
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अदानी ग्रुप को फ्री में कोयला खदानें दिलवाईं, ताकि सस्ते में बिजली का उत्पादन किया जा सके। गुजरात सरकार ने कोयला खदानें तो फ्री में मुहैया करा दीं, लेकिन बदले में 5.5 रुपये प्रति यूनिट की दर से अदानी ग्रुप से बिजली खरीदी। यह जनता के साथ धोखा है।
क्यों चुप रही कांग्रेस
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि गांधी नगर के पास विधायकों और सांसदों के लिए सस्ती दरों पर जमीन खरीदी गई थी, लेकिन जिन सांसदों और विधायकों यह जमीन मिली, उन्होंने इसे ऊंचे दामों में बेच दिया। इस तरह से कांग्रेस के सांसदों और विधायकों ने भी फायदा उठाया, इसलिए वे चुप रहे।
जूडिशरी पर भी सवाल
केजरीवाल ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए प्लाटों की बिक्री पर रोक लगा दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने मौजूदा जजों और रिटायर्ड जजों को भी प्लाट अलाट कर दिए। कुछ जजों को छोड़कर बाकी सभी ने इस ऑफर को स्वीकार कर लिया। आरोप है कि उसके बाद आज तक इस मामले पर सुनवाई नहीं हुई और विधायक सांसद अपने प्लाटों को स्टे आर्डर के बावजूद बेच रहे हैं।