कविता ने प्रधानमंत्री की सेल्फीविदडॉटर को लेकर की गई अपील पर उन्हें लेमडकपीएम कहा था जिसके बाद उनके खिलाफ ट्विटर पर हमले शुरू हो गए जो गाली गलौच पर पहुंच गए थे। बीबीसी संवाददाता जुबैर अहमद ने कविता से बात कर यह जानने की कोशिश की कि उन्होंने ऐसा क्यों किया और क्या उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया का अंदाज था।
पढिए कविता कृष्णन की बात उन्हीं के शब्दों में
सामान्य से ज्यादा लोगों ने समर्थन भी किया है। जो लोग हमला कर रहे हैं, खासतौर पर जो गाली-गलौच कर रहे हैं फेक हैंडल से, वह ट्विटर सेना है नरेंद्र मोदी, भाजपा, संघ परिवार की। इन लोगों को मैं बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेती हूं।
यह बहुत अच्छी बात है कि सेल्फीविदडॉटर के माध्यम से खुद को महिला पक्षधर दिखाने की बजाय वह अपनी असली मानसिकता, जो महिला विरोधी मानसिकता है, उसी को जाहिर कर रहे हैं। मुझे बलात्कार की धमकी और गंदे-गंदे संदेश भेजे जा रहे हैं।
डर लग रहा है?
मुझे तो बिल्कुल डर नहीं लग रहा है। मेरे परिवार के कुछ लोगों ने, कुछ परिचितों ने मुझसे संपर्क किया है और ध्यान से रहने की सलाह दी है।
ट्वीट में मेरा इशारा स्नूपगेट की तरफ था। उसमें पता लगा था कि पुलिसवालों को, इंटेलिजेंस वालों को अमित शाह की आवाज सुनाई देती है, जो कह रहे हैं कि साहब जानना चाहते हैं कि यह लड़की कहां जा रही है, किससे मिल रही है, किससे बात कर रही है, खासकर किन पुरुषों से मिल रही है आदि।
भाजपा का इस पर कहना था कि उस लड़की को और उनके पिता को इस पर कोई आपत्ति नहीं है, यह उनकी लड़की की सुरक्षा के लिए है।
सुप्रीम कोर्ट ने तो टैपिंग के कानूनी-गैरकानूनी होने की पडताल ही नहीं की, इसलिए हर नागरिक का अधिकार है कि सरकार ने जो जुर्म एक नागरिक के खिलाफ किया है उसका जवाब मांगे।
मैंने अपने ट्वीट में बहुत सीधा सा सवाल किया है कि उस महिला के फोन की टैपिंग की गई थी वह कानूनी थी या गैरकानूनी।
कैसा रक्षा बंधन?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिला पक्षधर होने का जो दावा है उस पर मैंने कई सवाल उठाए हैं। पहला था स्नूपगेट से संबंधित, दूसरा राखी से संबंधित।
मैंने अन्य जगह भी कहा है कि रक्षा बंधन को रक्षा के नाम पर बंधन बनाने वाले जो संघ परिवार के लोग हैं उनके खिलाफ तो मुंह नहीं खुलता है प्रधानमंत्री का। उसी रक्षा के नाम पर ऑनर किलिंग होती है कि हम तो सम्मान की रक्षा कर रहे हैं, हम महिला की रक्षा कर रहे हैं।
तीसरी बात यह कि गुजरात में और मुजफ्फरनगर में बहुत सारी महिलाओं का, बहुत सारी बेटियों का बलात्कार हुआ लेकिन उन सभी बलात्कारों पर नरेंद्र मोदी चुप हैं, मौन हैं।
और अंतिम सवाल मैंने उठाया था कि रक्षा बंधन के नाम पर वह अपने मंत्रिमंडल में जो महिलाएं हैं, मुख्यमंत्री हैं उनकी रक्षा करने पर आमादा हैं। शायद रक्षा बंधन के यही मायने हैं नरेंद्र मोदी के लिए।