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भुल्लर की सजा माफ करें राष्ट्रपति: जस्टिस काटजू

Sun, 14 Apr 2013 01:28 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू अब 1993 के दिल्ली बम ब्लास्ट के दोषी देविंदर पाल सिंह भुल्लर के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने मृत्युदंड पाने वाले भुल्लर की सजा माफ करने की अपील राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से की है।
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जस्टिस काटजू ने सुप्रीम कोर्ट से आतंकी की याचिका के खारिज होने के ठीक एक दिन बाद ही राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट के आतंकी ने सर्वोच्च अदालत से दया याचिका के निपटारे में देरी के आधार पर फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग की थी।

जस्टिस काटजू ने राष्ट्रपति को लिखे छह पन्नों के पत्र में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में भुल्लर की फांसी पर मुहर लगाई थी। यह फैसला 2-1 में बंटा हुआ था और जस्टिस एमबी शाह ने तीन सदस्यों की पीठ में अपनी अलग राय दी थी। वह इस पीठ के सबसे वरिष्ठ जज थे।
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स्टिस शाह ने इंगित किया था कि भुल्लर के खिलाफ सिर्फ उसका कथित इकबालिया बयान ही जांच में सबूत के तौर पर है। जस्टिस शाह ने टिप्पणी की थी कि जब अन्य आरोपियों जिनका नाम इकबालिया बयान में था। उन्हें सजा नहीं दी गई तो पुलिस की ओर से रिकॉर्ड किए एक आरोपी के तथाकथित इकबालिया बयान के आधार पर दोषी ठहराना इस मामले में सही नहीं।

जस्टिस काटजू के मुताबिक जस्टिस शाह ने यह भी दर्ज किया था कि प्रमाणित साक्ष्य के बगैर तथाकथित इकबालिया बयान पर यकीन करना मुश्किल होगा। पत्र में काटजू ने कहा है कि भुल्लर को ब्लास्ट का षड्यंत्र रचने का दोषी करार दिया गया है। भला सिर्फ एक आदमी को साजिश रचने के लिए दोषी करार कैसे दिया जा सकता है।

काटजू ने कहा है कि भुल्लर 18 साल से भी अधिक समय से जेल में बंद है। वह लंबी मानसिक पीड़ा झेल चुका है। अनुच्छेद 72 के तहत क्षमा प्रक्रिया में यह भी होना चाहिए। राष्ट्रपति को निर्णय लेते समय उसका ख्याल करना चाहिए।

पत्र में काटजू ने कहा है कि भुल्लर कई बीमारियों से पीड़ित है। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति से गुजारिश है कि भुल्लर की मौत की सजा को माफ कर दें। इस पत्र की प्रति काटजू ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर को भी भेजी है। गौरतलब है कि हाल ही में काटजू ने फिल्म अभिनेता संजय दत्त की सजा को माफ किए जाने की अपील की थी। दत्त को 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में दोषी करार दिया गया है।

गालिब को मिले भारत रत्न: काटजू
अपने बयानों से लगातार सुर्खियों में बने रहने वाले प्रेस परिषद के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू ने मशहूर उर्दू शायर मिर्जा गालिब को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिए जाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि देश में खास समुदाय से जुड़ी उर्दू भाषा से काफी भेदभाव होता रहा है।

काटजू ने कहा कि यह ‘बांटो और राज करो’ की नीति है। कुछ ही लोग जानते हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपना भाषण उर्दू में तैयार करते हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि मिर्जा गालिब को मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाना चाहिए। अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल और बीआर अंबेडकर को यह सम्मान मरणोपरांत दिया जा सकता है तो फिर गालिब को क्यों नहीं?’ काटजू शुक्रवार रात को यहां भारत, पाकिस्तान, अमेरिका और दूसरे देशों से आए शायरों के 15वें मुशायरे ‘जश्न-ए-बहार’ को संबोधित कर रहे थे। मुशायरे में क्रेंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी अपनी शायरी सुनाई।
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