भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू के देश में बढ़ती सांप्रदायिकता के लिए राजनेताओं को दोषी ठहराया है। अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय में गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदूओं और मुसलमानों को अलग करने की शुरुआत तो अंग्रेजों ने की पर आजादी के बाद नेताओं ने अपने वोट बैंक के लिए इस खाईं को गहरा कर दिया।
उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों को विभाजित करने के लिए अंग्रेजों ने पाकिस्तान जैसा कृतिम राज्य बनाया। अब समय आ गया है कि दोनों देशों के लोगों को विचार करना चाहिए कि अंग्रेजों ने अपने फायदे के लिए उनके दिल-दिमाग में एक दूसरे के खिलाफ जहर घोला था। बाद में इसी का फायदा उठा पाकिस्तान बना दिया। लेकिन दुखद सच्चाई यह है कि उनके एजेंटों ने आजादी के बाद भी यह अधम नीति जारी रखी।
देश में आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय निर्दोष मुसलिम युवकों को पकड़ कर जेल में डाल देती है। क्योंकि ऐसा करना उसके लिए आसान होता है। इसके अलावा एक प्रमुख कारण यह भी है कि अपराध की जांच के लिए हमारी पुलिस के पास न तो मार्डन तकनीक है और न ही आधुनिक उपकरण।