भोले की नगरी काशी में स्थापित गुजरात की पहली सतुआ बाबा संत पीठ से बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के तीन पीढ़ी पहले के संबंध का पता चला है।
पांचवें सतुआ बाबा नरोत्तम दास की वसीयत से गुजरात के उसी महिसाणा स्टेट के पुराने रिश्ते पर रोशनी पड़ी है, जहां से कभी उनके पूर्वज काशी आए थे। दरअसल मोदी का गांव वडनगर महिसाणा जिले में ही स्थित है।
गंगा और बनारस से खुद को जोड़ने वाले नरेंद्र मोदी का परिवार तीन पीढ़ी से काशी के सतुआ बाबा आश्रम से जुड़ा है।
सतुआ बाबा आश्रम से रहा है जुड़ाव
1774 में मणिकर्णिका घाट पर स्थापित गुजरात की पहली और सबसे पुरानी इस पीठ की शिष्यता 1940 में नरेंद्र मोदी के दादा गणेश दास मोदी ने ग्रहण की थी।
तब वे व्यवसाय के सिलसिले में यहां आए थे। बीएचयू के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने कहा, "इसका पता मोदी परिवार के सदस्यों से मिले तथ्यों और गुजरात-काशी रिश्ते को लेकर हुए अध्ययनों से पता चला है।"
उनका कहना है, "मोदी अपने अज्ञातवास के दौरान इसी सतुआ बाबा आश्रम में तीन महीना गुजार चुके हैं। तब इसी आश्रम में वे गोपनीय तरीके से साधना कर रहे थे।"
महिसाणा-वडनगर के संबंधों पर पड़ी रोशनी
गुजराती समाज के संत अनिल शास्त्री ने भी 70 साल पहले मोदी परिवार के काशी आने की पुष्टि की। महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने भी आश्रम से मोदी परिवार के पुराने संबंधों पर मुहर लगाई है।
उन्होंने बताया कि तीसरे सतुआ बाबा नरोत्तम दास के समय मोदी परिवार ने इस पीठ की शिष्यता ग्रहण की थी। बाबा नरोत्तम दास ने अपनी वसीयत में गुजरात की भावनगर, गोंडल, महिसाणा स्टेट के अलावा राजकोट के दीवान का जिक्र किया है।
महिसाणा स्टेट में ही मोदी का गांव वडनगर आता है। तीन सौ साल पहले जेठा पटेल ने जब गुजरात की इस संत पीठ की काशी में स्थापना की थी, तभी महिसाणा, वडनगर से लोग यहां आकर बसे थे।