इस बार चांद पिछले साल के मुकाबले थोड़ा पहले दिखाई देगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को 8 बजकर 13 मिनट पर चांद के दीदार होंगे। इस बार दो नवंबर को करवाचौथ के दिन 10 वर्षों के बाद रोहिणी नक्षत्र में शुक्र योग की युति होने से प्रबल योग बन रहा है। विशेष योग-संयोग के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। इस योग में सुहागिनों और अविवाहिताओं द्वारा की गई हर मनोकामना पूर्ण होगी।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय चतुर्थी को मनाए जाने वाले इस पर्व पर सोलह शृंगार की चाहत पूरी करने के लिए सुहागिनों में उत्साह है। कार्तिक मास की चतुर्थी के दिन विवाहित महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत किया जाता है। करवा का अर्थात मिट्टी के जल-पात्र की पूजा कर चंद्रमा को अध्र्य देने का महत्व हैं, इसीलिए यह व्रत करवा चौथ नाम से जाना जाता हैं।
करवा चौथ के पूरे दिन पत्नी द्वारा उपवास रखा जाता हैं। इस दिन रात्रि को जब आकाश में चंद्रय उदय से पूर्व सोलह सृंगार कर चंद्र निकलने कि प्रतिक्षा करती हैं। व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ ही उसे छलनी से देखा जाता हैं, उसके बाद पति के चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से महिलाएं अखंड सौभाग्यवती होती हैं, उसका पति दीर्घायु होता हैं। यदि इस व्रत को पालन करने वाली पत्नी अपने पति के प्रति मर्यादा से, विनम्रता से, समर्पण के भाव से रहे और पति भी अपने समस्त कर्तव्य एवं धर्म का पालन सुचारु रुप से पालन करें, तो एसे दंपत्ति के जीवन में सभी सुख-समृद्धि से भरा जाता हैं।