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कर्नाटक पर कांग्रेस का कब्जा, भाजपा का किला ढहा

Wed, 08 May 2013 11:05 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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कांग्रेस ने भाजपा के दक्षिण के एक मात्र किले कर्नाटक को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया है।
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भ्रष्टाचार के मोर्चे पर घिरी होने के बावजूद कांग्रेस ने अपने दम पर कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर सात साल बाद सत्ता में वापसी की है।

भाजपा से अलग हुए पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की पार्टी केजेपी ने कांग्रेस की इस जीत में अहम भूमिका निभाई है। जबरदस्त हार के बाद देर शाम मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस की आंधी में भाजपा के 12 मंत्री अपनी सीट नहीं बचा सके। इसमें उप मुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा का नाम भी शामिल है।

राज्य की 224 सदस्यीय विधान सभा में 223 सीटों पर मतदान हुआ था। जिसमें कांग्रेस को 121, भाजपा और जद-एस को 40-40 तथा केजीपी को छह सीटें मिली हैं। राज्य के कई सीटों के नतीजे बेहद अप्रत्याशित रहे हैं।
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मसलन राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार जी परमेश्वर कराटगेरे से चुनाव हार गए। चुनाव हारने वालों में येदियुरप्पा की करीबी शोभा करंदलजे भी शामिल हैं।

चुनाव में मिली जीत के बाद जहां कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है, वहीं भाजपा खेमे में निराशा का माहौल है।

हालांकि येदियुरप्पा की पार्टी केजेपी को महज छह सीटें ही हासिल हुई हैं, लेकिन उनके उम्मीदवारों ने दर्जनों सीटों पर कांग्रेस तथा जद एस की जीत की राह आसान कर दी।

रही सही कसर भाजपा से अलग हो कर नई पार्टी बनाने वाले पूर्व मंत्री बी श्रीरामुलु ने पूरी कर दी। इनकी पार्टी बीएसआर कांग्रेस ने चार सीटें जीती और कई सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को हराने में अहम भूमिका निभाई।

बहुमत हासिल करने के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन शुरू हो गया है। जद-एस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी की पत्नी अनीता कुमारस्वामी को हराकर समाजवादी पार्टी ने भी दक्षिण में अपना खाता खोला। सपा के सीपी योगेश्वरा ने छान्नापटना सीट पर उन्हें 6,404 वोट से मात दी।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस पद की दौर में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री एम मल्लिकार्जुन खड़गे और राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता सिद्दरमैया के नाम पर मंथन हो रहा है। कांग्रेस को यह बड़ी जीत ऐसे समय हासिल हुई है जब पार्टी भ्रष्टाचार के कई मामलों में बुरी तरह घिरी है।

मुख्य विपक्षी भाजपा ने अरसे से पार्टी और यूपीए सरकार के खिलाफ इसी मुद्दे पर मोर्चा खोल रखा था। यही कारण है कि जीत हासिल होने के साथ ही कांग्रेस और सरकार दोनों ही ओर से भाजपा पर तीखा हमला करते हुए जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने की नसीहत दी। हमला करने वालों में स्वयं प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं।

'राहुल गांधी हीरो, नरेंद्र मोदी जीरो'
कर्नाटक की जीत का सेहरा कांग्रेस अपने युवा उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी दे रही है, जिन्हें उत्तर प्रदेश के चुनाव में भारी निराशा का सामना करना पड़ा था। दूसरी ओर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कर्नाटक में चुनाव प्रचार किया था, लेकिन वह भाजपा की नैया पार नहीं लगा पाए।
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किसको कितनी मिली सीट
वर्ष------------कांग्रेस-------------भाजपा-----------जेडीएस-------------अन्य----------------केजेपी
2013----------121-------------40----------------40-----------------16----------------06
2008----------80-------------110----------------28-----------------06

(2013 में 224 में 223 सीटों पर मतदान हुए हैं। एक सीट पर 28 मई को मतदान होगा।)
कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री के दावेदार
एम. मल्लिकार्जुन खड़गे (केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री)
सिद्धरमैय्या (विधानसभा में विपक्ष के नेता)
वीरप्पा मोइली (पेट्रोलियम मंत्री)
आरबी देशपांडे (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)
आस्कर फर्नांडिस (कांग्रेस महासचिव)

इन दिग्गजों ने मारा मैदान
जगदीश शेट्टार, मुख्यमंत्री
बीएस येदियुरप्पा
सिद्धरमैय्या
एचडी कुमारस्वामी

इन्हें मिली हार
जी. परमेश्वर (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व सीएम पद के दावेदार)
अनीता कुमारस्वामी (प्रदेश जेडीएस अध्यक्ष कुमारस्वामी की पत्नी)
शोभा कारंदलजे (येदियुरप्पा की करीबी)
केएस ईश्वरप्पा (उप मुख्यमंत्री)
मुरुगेश आर निरानी (इंडस्ट्री मंत्री)
सीएम इब्राहिम (कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री)

‘परिणाम से साफ है कि जनता ने भाजपा की विचारधारा को खारिज कर दिया है। कर्नाटक की तरह देश की जनता भी जानती है कि कौन क्या है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को लोग ऐसे ही खारिज कर देंगे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस जीत के लिए सराहनीय प्रयास किए।’
-मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

‘कर्नाटक में परिणाम हमारे लिए चौंकाने और दुखी करने वाले हैं। इस हार के पीछे कई सारे कारण रहे। पार्टी बैठक कर हार के कारणों की समीक्षा करेगी।’
-राजीव प्रताप रूडी, भाजपा महासचिव
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