गोवा क्राइम ब्रांच ने अदालत में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत को भ्रष्टाचार में लिप्त आदतन अपराधी बताते हुए आरोप लगाया कि वह लुईस बर्जर घूसखोरी मामले में न केवल साजिश में शामिल थे बल्कि उन्होंने इसका लाभ भी लिया।
61 वर्षीय कामत की अग्रिम जमानत के जवाब में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में क्राइम ब्रांच ने आरोप लगाया कि कामत ने तब तक परियोजना की फाइल को लटकाए रखा जब तक कि उन्हें रिश्वत के पैसे नहीं मिल गए।
क्राइम ब्रांच ने पूछताछ के लिए कोर्ट से कामत को हिरासत में लेने की अनुमति भी मांगी। कोर्ट ने कामत को राहत देते हुए घूसखोरी मामले में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम सुरक्षा 12 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी थी क्योंकि क्राइम ब्रांच ने याचिका के जवाब के लिए और वक्त मांगा था।
अब तक 4 गिरफ्तारियां
हालांकि, क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को ही अपना जवाब दाखिल किया जिसमें कहा
गया कि ‘कामत ने भारत के साथ-साथ गोवा की छवि भी खराब की है।’
क्राइम
ब्रांच ने अपने जवाब में कहा, ‘आरोपी शाह कमेटी की रिपोर्ट और पब्लिक
अकाउंट्स कमेटी में खनन घोटाले में गोवा के खनन उद्योग में हुई अवैध
गतिविधियों में भी शामिल हैं।इससे पता चलता है कि वह आदतन अपराधी हैं जो
भ्रष्ट कार्यों में लिप्त रहे हैं।
जांचकर्ताओं ने अदालत को दी अपनी
रिपोर्ट में दावा किया है कि अलेमाओ को 40-50 लाख रुपए मिले थे जबकि इतनी
ही रकम कामत को दो बार मिली थी।
गोवा पुलिस ने इसी मामले में
आरोपी हवाला ऑपरेटर रायचंद सोनी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार, लुईस बर्जर
घूसखोरी मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
सीबीआई जांच की जरुरत नहीं
गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने कहा है कि लुईस बर्जर घूसखोरी मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पारसेकर ने कहा, ‘गोवा पुलिस की अपराध शाखा इस मामले में सही दिशा में आगे बढ़ रही है। मैं उनके काम में दखल नहीं देने जा रहा हूं। इस मामले को सीबीआई को सौंपने का कोई विचार नहीं है।
यह मामला गोवा पुलिस द्वारा देखा जा रहा है और इसमें राज्य में ही चार्जशीट दायर की जाएगी।’ गौरतलब है कि गोवा पुलिस ने इस मामले में राज्य के पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री चर्चिल अलेमाओ समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।