सुनने में शिकायत सामान्य लगे कि स्कूली किताब की बाइंडिंग खराब है और उसकी वजह से बच्चों को दिक्कत होती है।
दस साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की ओर से ऐसी ही सामान्य शिकायत पर की गई कार्रवाई ने साबित कर दिया था कि डॉ. कलाम के लिए बच्चे कितने महत्वपूर्ण हैं। एक बच्ची की शिकायत पर डॉ. कलाम ने कंपनी को इस कदर आड़े हाथों लिया कि कंपनी को लिखित रूप से माफी मांगनी पड़ी और उस बच्ची के लिए नई किताब भी भेजनी पड़ी।
इलाहाबाद की अग्निपथ कॉलोनी में रहने वाली अनुश्री शुक्ला इग्नू में बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। बात सन् 2004 की है, जब वह सेंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज में कक्षा चार में पढ़ती थीं। उस वक्त फ्रैंक ब्रदर्स एंड कंपनी (पब्लिशर्स) लिमिटेड नई दिल्ली से प्रकाशित ‘फ्रैंक सोशल स्टडीज’ नाम की पुस्तक कोर्स में शामिल थी। उसकी बाइंडिंग काफी खराब थी।
अनुश्री और साथ पढ़ने वाली छात्राओं की किताबें फटने लगी थीं। उन्हें दिक्कत होती थी। अनुश्री ने 17 दिसंबर 2004 को कुरियर के जरिये तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. कलाम को शिकायती पत्र भेजा।