चिंतक, शिक्षाविद, वैज्ञानिक पूर्व राष्ट्रपति एजेपी अब्दुल कलाम ने ताउम्र मौत की सजा का विरोध किया। अपनी पुस्तक ‘टर्निंग प्वाइंट’ केजरिये उन्होंने मौत की सजा के खिलाफ अपना पक्ष बेहद खूबसुरती से रखा।
राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद लिखी इस किताब में उन्होंने बताया कि दया याचिकाओं के अध्ययन में उन्होंने पाया कि मौत की सजा पाने संबंधी ज्यादातर मामले आर्थिक और सामाजिक विषमता के परिणाम थे।
यही कारण है कि अपने 5 साल के कार्यकाल में उन्होंने 50 दया याचिकाओं को केंद्र सरकार के पास पुनर्विचार के लिए भेजा। हालांकि कलाम के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल के धनंजय की ही दया याचिका ठुकराए जाने का एक मात्र उदाहरण है।
धनंजय ने एक छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी थी। कलाम ने धनंजय की दया याचिका को ठुकराने का इसी पुस्तक में कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि चूंकि इस घटना के सामाजिक या आर्थिक कारण नहीं थे, इसलिए अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एकमात्र धनंजय की ही दया याचिका ठुकराई।