बाल दासता और बाल मजदूरी के खिलाफ दुनिया ने तो कैलाश सत्यार्थी की आवाज़ सुनी। उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। बाल मजदूरी के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून भी बना। लेकिन सत्यार्थी की बात उनके अपने ही देश में नहीं सुनी जा रही है।
करीब दस साल से सत्यार्थी सरकार से बाल श्रम उन्मूलन के लिए प्रभावी कानून बनाने और इसके लिए बने अंतरराष्ट्रीय कानून को लागू करने का अनुरोध कर रहे हैं।
अमर उजाला से बातचीत में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि इसके लिए वह यूपीए के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और एनडीए सरकार के जमाने में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह कर चुके हैं।
उन्होंने सरकार को अपने लिखित प्रस्ताव में हर तरह के व्यवसाय और उद्योग में 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम लेने पर पूर्ण पाबंदी, खतरनाक उद्योगों में 18 साल से कम उम्र के किशोरों से काम लेने पर रोक, बाल मजदूरी के दोषियों पर कम से कम तीन साल की कैद और 60 हजार रुपये जुर्माने के साथ बच्चों के बकाए वेतन की पूरी वसूली, बाल श्रम उन्मूलन कानून में सभी बाल मजदूरों के पुनर्वास का अनिवार्य प्रावधान करने की मांग की है।