गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कांग्रेस पार्टी भले ही ‘फेंकू’ शब्द का इस्तेमाल कर रही हो, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के विद्युत मंत्रालय ने बिजली वितरण मामले में मोदी के गुजरात को ‘ए प्लस’ ग्रेड दिया है।
दूसरे शब्दों में कहें तो रेटिंग की इस परीक्षा में मोदी ने एक तरह से डिस्टेंशन प्राप्त कर टॉप किया है। खास बात यह है कि देश में गुजरात अकेला ऐसा राज्य है जिसकी वितरण कंपनियों को रेटिंग में सर्वोच्च स्थान मिला है।
दूसरे स्थान पर रहे पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र को मात्र ‘ए’ ग्रेड पर संतोष करना पड़ा है। विद्युत मंत्रालय के उपक्रम पावर फाइनेंस कारपोरेशन (पीएफसी) ने वितरण क्षेत्र की सरकारी कंपनियों को लेकर यह रेटिंग कराई है।
इसमें बिजली वितरण का घाटा कम करने व चोरी रोकने से लेकर उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों को आधार बनाया गया था। रेटिंग के लिए वितरण कंपनियों की आर्थिक हालत को प्राथमिकता में रखा गया था। हिमाचल प्रदेश और पंजाब को ‘बी प्लस’ ग्रेड मिला है।
उत्तर हरियाणा और दक्षिण हरियाणा वितरण कंपनी को मात्र ‘बी ग्रेड’ मिल पाया है। कभी ऊर्जा प्रदेश होने का दावा करने वाले उत्तराखंड को ‘सी ग्रेड’ में रखा गया है।
उत्तर प्रदेश की पूर्वांचल कंपनी को ‘सी प्लस ग्रेड’ मिला, लेकिन पश्चिमांचल, दक्षिणांचल, कानपुर और मध्यांचल को मात्र सी ग्रेड ही मिल पाया, जो कि अंतिम पायदान है।
रिपोर्ट में सिंधिया ने राज्यों की वितरण की स्थिति पर चिंता जताई है। पीएफसी की देखरेख में यह ‘संपूर्ण रेटिंग’ मशहूर रेटिंग एजेंसी आईसीआरए और सीएआरई ने की है।
जुलाई 2012 में राज्यों के विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में इस रेटिंग को लेकर फैसला किया गया था। इसका लक्ष्य राज्यों को उनकी खामियों की जानकारी देना भी था, ताकि वे अपने सिस्टम में सुधार कर सकें।
इसके लिए 100 नंबर रखे गये थे। 80 से ऊपर नंबर पाने वाली वितरण कंपनियों को ए प्लस’ का ग्रेड दिया गया। यह ग्रेड गुजरात की चारों कंपनियों को मिला है। 65 से 80 नंबर पाने वालों को ए ग्रेड मिला। इसमें दो राज्य है।
50 से 65 नंबर पाने वालों को बी प्लस ग्रेड मिला। इसमें 11 कंपनियां हैं।
35 से 50 तक को बी ग्रेड, 20 से 35 तक को सी प्लस ग्रेड तथा शून्य से 20 तक नंबर पाने वाले राज्यों को सी ग्रेड मिला।