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जस्टिस वर्मा समिति ने केंद्र को रिपोर्ट लागू करने की नसीहत दी

Thu, 24 Jan 2013 09:04 PM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
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महिलाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से कानून में बदलाव के उपाय सुझाने के लिए गठित जस्टिस जेएस वर्मा समिति ने अपनी रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय की नाराजगी को ठुकराते हुए उसे मील का पत्थर बताया है। समिति ने कहा है कि रिपोर्ट की नुक्ताचीनी करने के बजाय सरकार इसे सकारात्मक तरीके से ले।
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समिति के सदस्य पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम ने तो यहां तक कह दिया कि देश में बदलाव की पैरोकारी कर रहे कांग्रेस के नए उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी यह अच्छा मौका है कि वह रिपोर्ट को लागू करने के उपाय करें।

सुब्रह्मण्यम ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि समिति के मैंडेट पर सवाल खड़े करने से पहले सरकार और अफसरशाही को समझना होगा कि यह रिपोर्ट किसी खास व्यक्ति या सरकार के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के डरा देने वाले हालात को ध्यान में रख कर तैयार की गई है। अगर इन सिफारिशों को नकारात्मक तरीके से लिया गया तो देश की जनता को जवाब देना भारी पड़ जाएगा क्योंकि समिति ने पिछले एक महीने के काम के दौरान उनके गुस्से और असहाय मनोस्थिति को भांपा है।
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सुब्रह्मण्यम ने कहा कि यह राहुल गांधी के लिए भी अच्छा मौका है कि देश में महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी के लिए इन सिफारिशों को लागू करने के इंतजाम करें। गृह मंत्रालय की नाराजगी के बाबत पूछे गए सवाल पर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि लोगों ने समिति को अपनी 80,000 राय भेज कर यह जताया है कि सरकार और पूरा तंत्र किस हद तक असंवेदनशील हो गया है।

सुब्रह्मण्यम के मुताबिक सीबीआई और गृह मंत्रालय को 1999 से मालूम है कि देश के बच्चे और बच्चियां गायब हो रहे हैं। जिनका हर तरह से दिल दहला देने वाला शोषण हो रहा है। लेकिन कोई भी एजेंसी इस पर ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकारी तंत्र में कहीं न कहीं गहरी खोट है जिसे समझना जरूरी है। समिति ने यही बातें ध्यान में रख कर अपनी सिफारिशें तैयार की है।

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने रिपोर्ट पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि समिति ने अपने मैंडेट से आगे जा कर सिफारिशें कर दी हैं। सुब्रह्मण्यम के मुताबिक समिति को अपने मैंडेट का पूरा ख्याल था। लेकिन जिस तरह से देश के गंभीर सामाजिक हालात के मामले सामने आए उसके मद्देनजर चुनाव प्रक्रिया में बदलाव, पुलिस रिफॉर्म, शिक्षा प्रणाली में बदलाव, मानव तस्करी और बच्चों के गायब होने जैसे मामले को अलग नहीं रखा जा सकता था क्योंकि इन्हीं की कमियों का सीधा प्रभाव महिलाओं की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
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कमेटी के मैंडेट पर चर्चा के बजाय सरकार रिपोर्ट के पीछे की मंशा समझे और सकारात्मक सोच के साथ बदलाव की जरूरत पर गंभीरता से काम करे।
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