चलती बस में गैंगरेप की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा के लिए बने कानूनों की समीक्षा के लिए गठित जस्टिस वर्मा समिति ने सोमवार को अपना काम शुरू कर दिया। समिति ने 5 जनवरी तक वकीलों, कानून के जानकारों तथा समाज के अन्य प्रबुद्ध वर्ग से सुझाव देने को कहा है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी है।
इंडिया गेट पर रविवार को हुए हिंसक आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में इस तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति के अध्यक्ष जस्टिस वर्मा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश लीला सेठ तथा बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुबह्मण्यम को समिति का सदस्य बनाया गया है। पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप की घटना से इस समय पूरा देश गुस्से में हैं। दिल्ली के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी बलात्कार के दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने समिति से 30 दिन के अंदर कानूनों में ऐसे परिवर्तन के सुझाव देने को कहा है जिससे कि महिलाओं के प्रति अपराधों खासकर बलात्कार के मामलों की जल्द से जल्द सुनवाई हो सके तथा दोषियों को कड़ा दंड दिया जा सके। समिति ने आम जनता और कानून के जानकारों से 5 जनवरी तक सुझाव मांगा है।
सुझाव ईमेल- justice.verma@nic.in तथा 011-23092675 नंबर पर फैक्स के माध्यम से भेजा जा सकता है। इस कमेटी को वर्तमान कानूनों के तहत दोषियों को अधिकतम तथा जल्द सजा दिलाने के लिए कानून में जरूरी बदलाव के लिए सुझाव देने को कहा गया है।