रेप संबंधित मामले रोकने और महिलाओं की सुरक्षा कानून में बदलाव सुझाने के लिए बनी जस्टिस जे एस वर्मा कमेटी अपनी रिपोर्ट बुधवार को सरकार को सौंप सकती है। बीते 16 दिसंबर को दिल्ली में युवती के साथ हुई दरिंदगी की घटना पर पूरे देश में उठी आवाज की प्रतिक्रिया में सरकार ने इस कमेटी का गठन किया था।
कमेटी को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह देश में बढ़ रहे महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी बदलाव पर अपने सुझाव दे। उम्मीद जताई जा रही है कि संसद के बजट सत्र में इस रिपोर्ट पर दोनों सदनों में चर्चा की होगी।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे एस वर्मा ने महीने भर पहले काम संभालने के बाद देश की जनता और सरकार सहित विभिन्न संस्थाओं से राय मांगी थी। घटना से क्रुद्ध जनता ने अपनी राय के जरिए बलात्कारियों को मौत की सजा, आजीवन कारावास और रसायनिक उपायों से नपुंसक बनाने जैसी कड़ी सजा की मांग की है।
उधर विभिन्न महिला आयोगों ने भी कड़े कानून की ही वकालत की है। मगर कमेटी ने साफ कर दिया था कि वह कानून में बदलाव की सिफारिशों के हर पहलू पर गौर करने के बाद ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी। कमेटी ने इस बात पर खास ध्यान दिया है कि उनकी ओर से की जाने वाली सिफारिशों के गलत इस्तेमाल की गुंजाइश नहीं रहे।
जस्टिस वर्मा की अगुवाई वाली इस कमेटी में हिमाचल प्रदेश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश लीला सेठ और पूर्व सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रह्मणयम सदस्य के तौर पर हैं। कमेटी के सूत्रों के मुताबिक इस काम के लिए एक महीने का वक्त नाकाफी था। लेकिन लोगों के गुस्से के मद्देनजर सरकार चाहती थी कि रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंप दिए जाएं।