राज्यसभा के चेयरमैन डॉ. हामिद अंसारी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस रंजन गोगोई को बनाया है। इस समिति के प्रमुख रहे जस्टिस विक्रमजीत सेन के सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने के बाद ऐसा किया गया है।
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने हाल ही में ऐसा विचार व्यक्त किया था कि 31 दिसंबर को जस्टिस सेन के रिटायर होने के बावजूद उन्हें जांच पैनल का प्रमुख बनाए रखा जा सकता है, क्योंकि 1968 की जजों के खिलाफ जांच कानून में इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।
उन्होंने इस मसले पर फैसला लेने की जिम्मेदारी राज्यसभा के चेयरमैन अंसारी पर छोड़ दी थी। हालांकि कानून मंत्रालय ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जज होने के नाते जस्टिस सेन समिति के प्रमुख बने थे, ऐसे में उनकी जगह किसी की नियुक्ति होनी चाहिए।
बुधवार को राज्यसभा की ओर जारी अधिसूचना में कहा गया है कि चेयरमैन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस एसके गंगेले के खिलाफ लगे आरोपों की जांच जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली समिति से कराने का फैसला किया है। इसमें कलकत्ता हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मंजुला चेलुर और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल सदस्य होंगे।
गौरतलब है कि ग्वालियर में एक महिला जज का यौन उत्पीड़न करने का आरोप झेल रहे जस्टिस गंगेले के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए पिछले साल मार्च में 58 सांसदों ने अंसारी को एक नोटिस दिया था।