उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार की योजना परवान चढ़ी तो अगले तीन साल में नोएडा से लखनऊ का सफर मात्र 5 घंटे में सिमट जाएगा। ऐसा संभव होगा आगरा से लखनऊ तक बनने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद। इस ड्रीम प्रोजेक्ट को मंगलवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।
एक्सप्रेस-वे का निर्माण सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर कराया जाएगा। सात जिलों से होकर गुजरने वाले लगभग 270 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर 10,400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
अब एक्सप्रेस-वे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसमें पांच से आठ माह का वक्त लगने की संभावना है। डीपीआर तैयार हो जाने के बाद तय किया जाएगा कि कार्य आवंटन एक पैकेज में किया जाए या तीन पैकेज में।
एक ही डवलपर्स को पूरा कार्य देने या तीन हिस्सों में बांटकर काम कराने का विकल्प खुला रखा गया है। अगले साल मई-जून तक इसके लिए टेंडर होंगे। डवलपर्स के चयन के बाद एक्सप्रेस-वे के निर्माण में लगभग तीन वर्ष लगेंगे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में परियोजना के लिए नियुक्त कंसलटेंट ने तीन एलाइनमेंट सुझाए थे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के समक्ष इनका प्रस्तुतीकरण किया गया था जिसमें से आगरा से फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, हरदोई, मलिहाबाद होते हुए लखनऊ तक के एलाइनमेंट को स्वीकृत किया गया था। इसी एलाइनमेंट पर एक्सप्रेस-वे के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करके कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा गया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
डीपीआर तैयार होने में एक्सप्रेस-वे में पर्याप्त अंडर-वे तथा कैटल-वे की व्यवस्था की जाएगी तथा दोनों ओर 10.25 मीटर तक हरित पट्टी विकसित की जाएगी। एक्सप्रेस-वे कस्बों एवं गांवों से दूर होगा तथा इससे मुख्य शहरों को बाईपास से जोड़ा जाएगा। इसके बनने से दिल्ली और लखनऊ के बीच पहुंचने में कम वक्त लगेगा। कन्नौज के इत्र, फिरोजाबाद के कांच, आगरा के चमड़ा उद्योग के साथ ही हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी।
एक्सप्रेस-वे की खासियत
--छह लेन का प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस-वे, भविष्य में हो सकेगा आठ लेन।
--यह एक्सप्रेस-वे आगरा में यमुना एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा।
--बाढ़ से बचने के लिए एक्सप्रेस-वे जमीन की सतह से काफी ऊंचा होगा।
--परियोजना की लागत लगभग 10,000 करोड़ होगी।
--उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण कम से कम होगा।
--एक्सप्रेस-वे का अधिकांश हिस्सा नहर की पटरियों पर पड़ रहा है।
--सरकारी जमीन होने के कारण ज्यादा भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं।
--सड़क के दोनों ओर ग्रीन फील्ड बेल्ट तैयार होगी।
--सड़क के दोनों ओर झील, तालाब व इको फ्रैंडली पार्क विकसित होंगे।
--अभी आगरा से लखनऊ की सड़क मार्ग की दूरी 350 किमी है। एक्सप्रेस-वे बनने से यह दूरी घटकर लगभग 270 किमी रह जाएगी। इस तरह यह दूरी केवल तीन घंटे में पूरी हो सकती है।
--जब यह एक्सप्रेस-वे यमुना एक्सप्रेस वे से जुड़ जाएगा तो नोएडा से लखनऊ की दूरी पांच से छह घंटे में पूरी की जा सकेगी।
कैबिनेट के अन्य फैसले
--घाटमपुर बिजली परियोजना के लिए जॉइंट वेंचर कंपनी बनाने को हरी झंडी
--चीनी मिलें बेच सकेंगी अपना अवशेष शीरा
--सैफई में स्थापित होगा पुरुष स्पोर्ट्स कॉलेज
--हाईस्कूल पास एससीएसटी छात्रों के खाते में जमा होगी छात्रवृत्ति
--गांधी जयंती पर खादी वस्त्रों पर 10 फीसदी की छूट
--उन्नतशील प्रजातियों के प्रमाणिक बीजों पर मिलेगा अनुदान
--बुंदेलखंड तथा विंध्य क्षेत्र में सिंचाई जल उपयोग बढ़ाने की योजना
--पीडीएस में बायोमीट्रिक स्मार्ट कार्ड व पीओएस मशीन को मंजूरी
--नवसृजित जिलों में जिला योजना समितियों के गठन का रास्ता साफ
--एएनएम व जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने को मंजूरी
--निजी पॉलीटेक्निक में प्रवेश के लिए नीति को हरी झंडी
--नाबार्ड से ऋण लेने के लिए 4100 करोड़ की शासकीय गारंटी स्वीकृत