देश की अर्थव्यवस्था की बदहाली के लिए यूपीए सरकार पर बरसते हुए भाजपा ने कहा है कि यह सब इसलिए हुआ कि प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को फैसले करने का अधिकार ही नहीं है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि सरकार के फैसले कैबिनेट नहीं कर पा रही है, बल्कि कहीं बाहर से हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट रबर स्टांप रह गई है।
पार्टी महाधिवेशन में पेश भाजपा के आर्थिक प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए डॉ.जोशी का संकेत दस जनपथ की ओर था। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामी का दोष गठबंधन के सहयोगी दलों पर थोप देती है, जबकि हकीकत यह है कि सरकार के पास फैसले करने का अधिकार ही नहीं है। भाजपा के इस आर्थिक प्रस्ताव में देश की अर्थव्यवस्था की बदहाली के लिए यूपीए सरकार की गलत नीतियों को मुख्यतौर पर दोषी माना गया है।
प्रकाश जावडेकर के पेश इस प्रस्ताव में एक और एनडीए शासन की उपलब्धियां गिनाई गई हैं तो दूसरी ओर कांग्रेसनीत गठबंधन की नाकामी। जावडेकर ने कहा कि 1898 में जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार बनी थी तब देश की जीडीपी चार फीसदी थी और 2004 में सत्ता से हटने पर यह दर 8.25 पहुंच गई थी। दूसरी ओर अब अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के शासन काल में जीडीपी की दर घटकर लगभग आधी रह गई है।
अटल सरकार ने महंगाई को हमेशा ही नियंत्रण में रखा। भाजपा के इस प्रस्ताव से साफ है कि पार्टी अब लोकसभा चुनाव में अटल सरकार बनाम मनमोहन सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखेगी। यूपीए के शासन की महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा समेत सभी मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी। पार्टी का राजनीतिक प्रस्ताव रविवार को आएगा।