बिहार के विभाजन के समय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों की पेंशन के मद में तय रकम के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को राहत प्रदान नहीं की। सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद अब झारखंड सरकार को लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये का भुगतान बिहार को करना होगा।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में झारखंड सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। झारखंड सरकार का तर्क था कि राज्य की जनसंख्या के अनुपात से पेंशन की रकम की अदायगी की जानी चाहिए। अन्य राज्यों के विभाजन के समय में यही प्रक्रिया अपनाई गई थी। मगर बिहार सरकार ने कहा कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत तय की गई शर्तों के अनुसार झारखंड को रिटायर्ड कर्मचारियों की संख्या के अनुपात में राशि देनी होगी।
झारखंड सरकार ने पुनर्गठन अधिनियम के उन प्रावधानों को चुनौती देने की बात कही, जिसमें उस पर पेंशन की रकम का बोझ लादा गया है। अदालत का मत था कि वर्तमान याचिका के जरिए अधिनियम के प्रावधानों की वैधानिकता को चुनौती नहीं दी जा सकती।