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जाट आंदोलन ने लगाया 'हैपनिंग हरियाणा' पर ग्रहण

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जाट आरक्षण मामले में भड़की हिंसा ने निवेश जुटाने के लिए गुड़गांव में होने जा रहे ‘हैपनिंग हरियाणा’ पर ग्रहण लगा दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना से पहले राज्य में बदले अराजक माहौल ने निवेश की संभावना धो दी है। चिंतित गृह मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को दिन भर मुुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से स्थिति का जायजा लेते रहे।
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कहा जा रहा है कि आंदोलन के हिंसक और हाथ से निकलने के पीछे राज्य के दो जाट मंत्रियों के बीच चौधराहट की जंग भी बड़ा कारण बनी। खुद को इस बिरादरी का इकलौता नेता साबित करने की होड़ में एक मंत्री ने आंदोलनकारियों के समक्ष मुख्यमंत्री की ओर से सभी मांगें मान लिए जाने का दावा किया, जबकि दूसरे ने आरक्षण का हक छीन कर लेने की बात कही थी।

जाट आरक्षण मामले के उग्र रूप ले लेने और हाथ से निकल जाने के बाद हरियाणा में जाट और गैर जाट के बीच हिंसक झड़प की शुरुआत ने केंद्र तथा पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इसकी मुख्य वजह गैर जाटों में फैली नाराजगी है। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार के जाट मंत्रियों की अनुभवहीनता सीएम खट्टर पर भारी पड़ गई।
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आंदोलनकारियों ने मंत्रियों पर नहीं किया भरोसा

राजनीतिक अनुभव न होने और अपनी बिरादरी पर खास पकड़ न होने के कारण आंदोलनकारियों ने इन मंत्रियों पर भरोसा नहीं जताया। इन मंत्रियों और इसी बिरादरी के प्रदेश अध्यक्ष की अपने समाज पर पकड़ का आलम यह है कि इन सभी के पैतृक गांव में न केवल आंदोलनकारियों ने जाम लगाया बल्कि वित्त मंत्री के घर पर हमला भी किया।

सूत्रों का कहना है कि राज्य पुलिस ने भी इस मामले में सरकार का पूरा सहयोग नहीं किया। इसके अलावा आंदोलन की शुरुआत में सीएम खट्टर ने अपने अनुभवी मंत्रियों की सलाह न लेकर जाट बिरादरी के मंत्रियों पर ही भरोसा किया।

बताया जा रहा है कि गृह मंत्री ने सीएम खट्टर को राज्य में जाट बनाम गैर जाट के बीच झड़प बढ़ने के प्रति आगाह किया है। जाट आंदोलन से ऊबे गैर जाट बिरादरी के कई नेताओं ने शनिवार को यातायात खुलवाने के लिए सड़क पर उतरने की धमकी दी है।
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