जाट आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे रद्द करने का आदेश दिया है। सर्वोच्च अदालत के मुताबिक जाटों को आरक्षण की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कहा कि आरक्षण की बुनियाद जाति नहीं होना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक जाटों की आर्थिक स्थिति उतनी खराब नहीं है कि उनको आरक्षण का लाभ मिल जाए। कोर्ट ने कहा कि पिछड़ापन सामाजिक होना चाहिए, आर्थिक नहीं।
हालांकि इस फैसले के बाद भी नौ राज्यों में स्थानीय नौकरियों में आरक्षण लागू रहेगा। बता दें कि ये आरक्षण यूपीए सरकार के दौरान लागू किया गया था। जिसे मोदी सरकार ने भी जारी रखा था।