लंबे समय से आम आदमी पार्टी का मुख्य वादा रहा जनलोकपाल बिल पर सत्ता में आने के बाद पार्टी हरकत में आ गई है। दिल्ली में जनलोकपाल बिल को लागू करने के लिए पार्टी ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में जनलोकपाल बिल के मसौदे को लेकर चर्चा होगी। पार्टी की ओर से कहा गया कि कानून मंत्रालय से अभी जनलोकपाल बिल का मसौदा नहीं मिल पाया है। इसलिए अभी तक इस पर चर्चा नहीं हो पाई।
सत्ता में आने से पहले अरविंद केजरीवाल ने जनता से वादा किया था कि उनकी सरकार अगर सत्ता में आई तो दिसंबर में रामलीला मैदान में जनलोकपाल बिल पास कराया जाएगा। लेकिन सरकार बनने के एक महीने बाद भी जन लोकपाल बिल को लेकर आम आदमी पार्टी ने सिर्फ आश्वासन ही दिया।
रामलीला मैदान में नहीं पारित होगा जन लोकपाल
चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि विधानसभा सत्र की जगह जन लोकपाल बिल को रामलीला मैदान में पारित कराया जाएगा।
लेकिन आज सरकार में शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने साफ किया जन लोकपाल रामलीला मैदान की जगह इंदिरा गांधी स्टेडियम में पारित कराया जाएगा।
इस मुद्दे पर हो रही लेटलतीफी को लेकर आम आदमी पार्टी पहले से ही काफी आलोचनाएं झेल चुकी है। अब देखना होगा कि बिल को रामलीला मैदान में पारित कराने के वादे से मुकरने के बाद समर्थक का रूख क्या होगा।
DELHI POLICE और MCD होंगे जन लोकपाल के दायरे में
दिल्ली सरकार जनलोकपाल बिल में दिल्ली पुलिस, नगर निगम और डीडीए को भी लाना चाहती है। दिल्ली सरकार की कोशिश रहेगी कि भ्रष्टाचार के मामलों में जल्द से जल्द जांच हो और छह महीने के अंदर ही कार्रवाई हो।
जनलोकपाल बिल के जरिए दिल्ली सरकार भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने की तैयारी में है।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के कार्यालयों से भ्रष्टाचार की विदाई हो चुकी है। उन्होंने कहा मेरे पास ऐसी जानकारियां आ रही हैं, जिनमें बताया गया है कि राज्य सरकार के कार्यालयों में लोग अब रिश्वत लेने से घबराते हैं और लोगों के काम समय पर हो रहे है।
संख्या बल को लेकर संशय में सीएम
जब जनलोकपाल बिल पास कराने को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सवाल किया तो उन्होंने कहा बिल को पास कराने को लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में दिल्ली जन लोकपाल विधेयक पर विचार विमर्श करेंगे।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में वह संख्या बल के लिहाज से बहुमत में नहीं है इसलिए पता नहीं है कि कांग्रेस और भाजपा का इस पर क्या रुख होगा।