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चौका-बर्तन करने वाली यूपी की बेटी बनी देश के लिए मिसाल

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देश के फलक पर अमरोहा जिले का नाम रोशन करने वाली शिक्षिका जमरूर्द जहां की सच्चाई और ईमानदारी का नतीजा तीस साल बाद राष्ट्रपति पुरस्कार के रूप में सामने आया है।
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यह उनकी लगन और मेहनत का ही फल है कि मुरादाबाद के नई बस्ती की रहने वाली राजमिस्त्री पिता बहादुर हुसैन की बेटी राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कर मिसाल बन गईं हैं।

गुरबत में पालन पोषण के बीच पढ़ाई की ही लगन थी कि फीस जमा करने के लिए चौका-बर्तन तक किया। राष्ट्रपति पुरस्कार लेकर अमरोहा लौटीं जमरूर्द जहां की अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान आंखें भर आईं।
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कई बार शाम का खाना भी नहीं बनता था

अमरोहा के राजकीय बालिका इंटर कालेज में तीस वर्ष पूर्व मुरादाबाद की रहने वाली जमरूर्द जहां को उर्दू शिक्षिका के रूप में नौकरी मिली थी। जमरूर्द जहां कहती हैं कि इस बीच न जाने कितनी छात्राओं का उन्होंने भविष्य संवारा।

उनके शैक्षिक सफर के बीच पति की मृत्यु हो गई। तीन बच्चों के परिवार को बमुश्किल संभाला। जमरूर्द जहां कहती हैं कि उनके दो भाई और एक बहन हैं, पिता जब राजमिस्त्री थे तो कई बार ऐसा होता था कि काम नहीं मिलने पर शाम का खाना भी नहीं बनता था।

परिवार के पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर रहने के कारण पढ़ाई के लिए खुद चौका-बर्तन शुरू कर दिया। इससे वे फीस की व्यवस्था करतीं थीं। गरीबी के कारण भाई और बहन की पढ़ाई-लिखाई नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि, मैंने खुद भाइयों के साथ पीतल के बर्तनों की छिलाई की और उससे मिले रुपयों से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की।
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राष्ट्रपति ने दिया सम्मान, तो सफल हुई मेहनत

जमरूर्द जहां का कहना है कि जब दिल्ली में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया, तब उनकी मेहनत सफल हुई। तीन सिंतबर को अमरोहा से जाकर दिल्ली के अशोका होटल में केंद्र सरकार के मेहमान के रूप में रहीं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से भी भेंट हुई। जमरूर्द जहां कहती हैं वे गुरबत के दिनों को नहीं भूल सकतीं।

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त उर्दू शिक्षिका जमरूर्द जहां कहती हैं कि छात्राओं की दुआ की वजह से मुझे पुरस्कार मिला है। उन्होंने तीस साल से साथ में काम कर रहे स्टाफ का सहयोग के लिए आभार जताया है। जमरूर्द जहां को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने के बाद पांच साल का सेवा विस्तार मिला है। वे 2017 में सेवानिवृत होतीं, लेकिन पुरस्कार मिलने के बाद अब 2022 में सेवानिवृत्त होंगी।

राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित जमरूर्द जहां को एक मेडल, पचास हजार रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र, एक बुकलेट, शाल भी मिली है। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त जमरूर्द जहां ने बताया कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने उन्हें यह संदेश दिया है कि वह विद्यार्थियों को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा की ओर ध्यान देने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को ऐसी शिक्षा ग्रहण करने की जरूरत है जिससे उन्हें जल्द पैरों पर खड़े होने के अवसर प्राप्त हो।
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