जम्मू एयरपोर्ट पर रोके जाने से बौखलाए भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर किसी एक परिवार की निजी संपत्ति नहीं है। यहां तक कि मीडिया को भी चुप रखा जा रहा है, इसलिए पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
जेटली ने कहा कि अगर भाजपा शासित प्रदेशों में कांग्रेस नेताओं को रोकने के लिए धारा 144 लगा दी जाए, तो हंगामा शुरू हो जाएगा।
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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जेटली ने कहा कि भारत 'बनाना रिपब्लिक' नहीं है। जबकि यह मामला केवल हो समुदायों के बीच हिंसा का नहीं है। लोग वहां असहाय हो रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। इसे तत्काल नियंत्रित होना चाहिए था। उन्होंने पूरे घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
उधर, जेटली की टिप्पणी से नाराज फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि 2002 में गुजरात ने लोगों को अहमदाबाद जाने से राका था। वहां सेना की तैनाती नहीं थी। लेकिन गुजरात नरेंद्र मोदी की संपत्ति नहीं है।
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हालांकि किश्तवाड़ के दंगे पर सभी पार्टियों ने केन्द्र और राज्य को एकजुट होकर कदम उठाने की सलाह दी है। वामदल के नेता सीताराम येचुरी, तृणमूल के सुखेंदू शेखर रॉय केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच से ही पता चलेगा कि इस हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है।