सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर से सैन्य बल विशेषाधिकार कानून (एएफएसपीए) को हटाना सही नहीं होगा। जनरल सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य के हालात को देखते हुए बिना एएफएसपीए के सेना आतंकवाद से नहीं लड़ सकती है। उनके मुताबिक यह कानून उग्रवाद और आतंकवाद प्रभावित इलाकों में लड़ने के लिए सेना को बराबर की ताकत देता है।
नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बर्बर करतूतों के चलते पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए जनरल सिंह ने कहा कि जम्मू और कश्मीर जैसे आतंकवाद ग्रस्त इलाकों में आतंकवादी आम लोगों के बीच में छिपकर हमले करते हैं। वह नागरिकों को डराकर उनके साथ मिल जाते हैं और सेना के खिलाफ मोर्चाबंदी करते हैं। इन जटिल हालात में विशेष कानून के बिना कार्रवाई करना संभव नहीं। अगर सेना को कार्रवाई करनी है तो एएफएसपीए का लागू होना जरूरी है।
गौरतलब है कि सेना पर इस फौजी कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित राज्य के कई राजनीतिक दल लंबे समय से इसे हटाने की मांग करते रहे हैं। पिछले दो साल से राज्य में उठ रही इस मांग पर केंद्र सरकार ने गेंद सेना के पाले में डाल दी है। इस मसले पर हुई कई उच्चस्तरीय बैठक में सेना लगातार इसका विरोध करती रही है। सेना ने सरकार को साफ तौर पर बता रखा है कि अगर जम्मू-कश्मीर से एएफएसपीए हटाया गया तो सेना को भी वहां से हटाना पड़ेगा।