ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा के लिए सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दोषी ठहराया है।
उन्होंने कहा है कि मुजफ्फरनगर में दंगों के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। दंगे होते रहे लेकिन मुख्यमंत्री ने कार्रवाई नहीं की।
रमेश ने कहा कि अखिलेश इस नीति पर भरोसा किए रहे कि कार्रवाई की गई तो वोटर बंट जाएंगे और सपा को इसका फायदा होगा।
रमेश ने इस महीने की शुरुआत में भी दंगों के लिए समाजवादी और बीजेपी के नापाक गठजोड़ का सवाल उठाया।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे अखिलेश पर दंगे करवाने के आरोप नहीं लगा रहे हैं और न ही उनकी तुलना गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से कर रहे हैं।
'मोदी के कारण अटका जीएसटी'
रमेश ने नरेंद्र मोदी को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को लागू न होने देने का भी दोषी ठहराया, जबकि जीएसटी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की ही योजना थी।
रमेश का कहना था कि बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मीदी जीएसटी के सबसे मजबूत पैरोकार थे लेकिन नरेंद्र मोदी उतने ही बड़े विरोधी। सिर्फ नरेंद्र मोदी के विरोध की वजह से ही जीएसटी लागू नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि मोदी हर चीज खुले में कहने का दावा करते हैं। मैं चाहता हूं कि वह देश को बताएं कि जीएसटी का विरोध क्यों कर रहे हैं? इस मामले में वह अपनी ही पार्टी का विरोध क्यों कर रहे हैं।
क्यों वह सुशील मोदी, सुषमा स्वराज और नितिन गडकरी और यशवंत सिन्हा का विरोध कर रहे हैं। रमेश ने कहा कि जीएसटी पर हर ओर सहमति है। मोदी का समर्थन करने वाले उद्योग संगठन और कंपनियां भी जीएसटी के पक्ष में हैं।
बीजेपी के चुनाव घोषणा पत्र में जीएसटी लागू करने की बात कही गई है। पार्टी के कई नेता जीएसटी के पक्ष में हैं। लेकिन सिर्फ नरेंद्र मोदी ने अकेले जीएसटी का विरोध किया और इसे परवान नहीं चढ़ने दिया।