जयपुर में शुक्रवार से शुरू हो रहे कांग्रेस की चिंतन शिविर की बैठक में अगले लोकसभा चुनाव के लिए यूपीए सरकार के संभावित तोहफों को लेकर अंतिम रणनीति बनाई जाएगी। नकद सब्सिडी के बाद गरीबी रेखा से नीचे बीपीएल वर्ग के लोगों को मोबाइल देने, खाद्य सुरक्षा कानून को अंजाम देने के साथ ही भूमि अधिग्रहण कानून की योजना पर आगे बढ़ने की अंतिम रूपरेखा भी चिंतन बैठक में बनेगी।
अगले लोकसभा चुनाव से ठीक डेढ़ साल पहले कांग्रेस खुद को तैयार करने की कसरत में जुट गई है। यूपीए और कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक चुनौतियां हो या फिर देश की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने की बात, पार्टी हर मसले पर खुलकर विचार करना चाहती है। दिल्ली गैंगरेप के बाद पार्टी महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी मंथन करेगी। वहीं पाक से चल रहा मौजूदा टकराव भी चिंतन बैठक की चर्चा की दिशा प्रभावित करेगा।
यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में शुरुआती साढ़े तीन साल बेहद खराब रहे। भ्रष्टाचार और महंगाई की बदनामी से घिरी सरकार के खिलाफ सड़कों पर जनता आ गई है। लोकपाल विधेयक के मसले पर अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल का आंदोलन हो या संसद में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष की घेरेबंदी।
कांग्रेस का राजनीतिक ग्राफ नीचे की ओर लुढ़क रहा है। राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में गठित समूह करेगा। गठबंधन की राजनीति पर कांग्रेस कैसे आगे बढ़ेगी, इस मसले पर भी पार्टी विचार करेगी। जबकि देश के सामने गहराते आर्थिक संकट से निपटने की चुनौती भी पार्टी के सामने है। दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में गठित समूह के लिए महंगाई के मुद्दे से पार पाना आसान नहीं होगा।