उड़ीसा के पुरी में रथयात्रा महोत्सव की भव्य शुरूआत हो गई है।
नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में शामिल होने के लिए देश-दुनिया लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं।
12वीं शताब्दी में बने भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार लायंस गेट के बाहर इस मौके पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा नजर आया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़
भगवान जगन्नाथ को लाल और पीला रंग धारण किए नंद घोष से सज्जित 16 पहियों वाले रथ में, बलभद्र को लाल और हरे ताम्र ध्वज लगे 14 पहियों वाले रथ और देवी सुभद्रा को लाल और काले देवदालना से सजे 12 पहियों वाले रथ में बैठाया गया।
पारंपरिक रीति रिवाज के मुताबिक रथयात्रा की शुरुआत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ के आगे ‘छेरा पहारा’ (सोने के झाडू बुहारने) की रस्म के साथ शुरू हुई।
इसके बाद तीनों रथों को भगवान जगन्नाथ की मौसी के घर ‘गुडीचा मंदिर’ की ओर से रवाना किया गया।
आनंदीबेन ने बनाया अनूठा रिकॉर्ड
अहमदाबाद में गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने भगवान जगन्नाथ की 137वीं रथ यात्रा के पहले इसके मार्ग में सोने का झाड़ू लगाने की ‘पहिंद विधि’ कर एक और अनूठा रिकार्ड अपने नाम कर लिया।
वर्ष 1878 से यहां जमालपुर क्षेत्र में स्थित करीब 400 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर से निकल रही रथ यात्रा में यह पहला मौका था, जब किसी महिला ने ‘पहिंद विधि’ की हो।
इससे पहले लगभग एक दशक तक तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सोने का झाड़ू लगा कर रथयात्रा को रवाना करते थे।