फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आयुर्वेदिक तरीके से कुत्तों का इलाज करेगी आईटीबीपी?

Mon, 11 May 2015 04:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा आयुर्वेद पर दिए जा रहे जोर का असर दिखने लगा है। आईटीबीपी के पशुचिकित्सक ने दावा किया है कि उसने कुत्तों को अर्थोराइटिस से बचाने का आयुर्वेदिक इलाज ढूंढ़ लिया है।
विज्ञापन


हल्दी, पीपर और रिफाइंड तेल की मदद से कुत्तों को इस बीमारी से ठीक किया जा सकता है। इस इलाज का ईजाद कमॉण्डेंट सुधाकर नटराजन ने किया है जो आईटीबीपी में पिछले 23 सालों से सेवारत हैं।

इस नए इलाज का इन्होंने सफल परीक्षण भी किया है। इन्हें उम्मीद है कि सरकार इसे आगे ले जाएगी और इसे बढ़ावा देगी।

जब कुत्ते पर नहीं कामयाब हुआ कोई इलाज

नटराजन ने कहा कि अर्थाराइटिस से पीड़ित कुत्ते पर जब कोई इलाज कामयाब नहीं हुआ तो उन्होंने उसे आधा चम्मच हल्दी, एक चौथाई चम्मच पीपर और आधा चम्मच रिफाइंड तेल पिलाना शुरू किया।

ये काम उन्होंने लगातार दस महीने तक किया जिसके बाद वो कुत्ता एकदम स्वस्थ हो गया और अपनी सारे काम पहले की तरह करने लगा। आईटीबीपी के मुताबिक स्नीफर डॉग केली साल भर पहले एक ऑपरेशन पर फोर्स के साथ गया था।

जिसके बाद ही वो अर्थराइटिस का शिकार हो गया। उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी। वो कहीं आने जाने में भी अक्षम था और लगातार रोता रहता था।

हैवी एंटी डोज देने से खतरा

नटराजन ने बताया कि इस तरह के रोगों से पीड़ित कुत्तों को सुलाने के लिए पेनकिलर के हैवी डोज दिए जाते हैं जिससे उनकी किडनी और लीवर खराब होने का डर बना रहता है।

हमारे पास खोने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए मैंने सोचा कि एक प्रयोग किया जाए, जो मैंने अपने परिवार से सीखा था। इस इलाज ने अद्भुत रूप से काम किया है।

केली में अर्थाराइटिस के लक्षण पिछले साल मेडिकल चेकप के दौरान ही नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा कि इस रोग के लिए बाजार में कई दवाएं मौजूद हैं लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि सारी दवाएं कारगर साबित हो ही जाएं।
विज्ञापन

इस शोध को आगे ले जाना होगा

तीन महीने के लगातार इलाज के बाद केली में ठीक होने के लक्षण नजर आने लगे थे। नटराजन आगे कहते हैं कि इस साल अप्रैल में केली एक बॉल के पीछे दौड़ पड़ा और उसके हड्डियों के जोड़ों के दर्द खत्म हो चुके थे।

नटराजन का कहना है कि अब इस शोध को बड़े स्तर तक लेकर जाना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इसे आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें