पांच वर्ष पहले शाहजहांपुर में ट्रेन केऊपर बैठे नवयुवकों की फुटओवर ब्रिज से टकराने से हुई मौत केमामले को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर बताया है। शीर्ष अदालत ने यह सवाल उठाया कि जब स्टेशन मैनजर को पता था कि ट्रेन के ऊपर लोग बैठे हुए हैं तो उसने ट्रेन को चलाने की इजाजत क्यों दी। नतीजा हुआ है कि कई लोगों की जान चली गईं और कई घायल हो गए।
मालूम कि भारतीय-तिब्बत सीमा पुलिस(आईटीबीपी) में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की भर्ती के लिए बरेली में करीब तीन लाख नवयुवक आए थे। एक फरवरी 2011 को भर्ती में आए लोग हिमगिरी एक्सप्रेस के ऊपर बैठकर जा रहे थे। शाहजहांपुर यार्ड के पास स्थित फुटओवर बिज्र से टकराकर 22 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मरने और घायल होने वाले उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच थी।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी सवाल किया कि क्यों नहीं ड्राइवर ने ओवरहेड ब्रिज के पहले ट्रेन रोकी, जबकि उसे मालूम था कि ट्रेन केऊपर लोग बैठे है और वे सभी फुट ओवर ब्रिज से टकराएंगे। पीठ ने पाया कि उस वक्त ट्र्रेन की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे थी। पीठ ने कहा कि क्या वहां फिल्म शोले की तरह हालात तो नहीं थे जब ड्राइवर को बंदूक की नोंक पर ट्रेन चलाने का दबाव है।
ऐसी स्थिति में समझदार आदमी को क्या करना चाहिए?
पीठ ने सरकार, आईटीबीपी और रेलवे की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल
(एएसजी) पिंकी आनंद से सवाल किया कि इस स्थिति में समझदार या विवेकी
व्यक्ति को क्या करना चाहिए? जवाब में एएसजी ने कहा कि लेकिन वहां हालात
सामान्य नहीं थे। तीन लाख लोग वहां थे। स्थिति तनावपूर्ण थी।
पीठ ने
कहा कि आईटीबीपी को जब यह पता था कि इस भर्ती के लिए इतनी बड़ी संख्या में
लोग आएंगे तो भर्ती का आयोजन एक ही जगह पर क्यों किया गया? क्यों नहीं कई
शहरों में भर्ती आयोजित की गई? पीठ ने यह भी कि देश के किसी भी शहर के लिए
तीन लाख लोगों को हैंडिल करना मुश्किल है।
इस पर आईटीबीपी ने कहा कि जिला
प्रशासन को इसका जानकारी दे दी गई थी। भर्ती महज 417 लोगों की होनी थी, ऐसे
में तीन लाख लोगों का आना अप्रत्याशित था।
जनहित याचिका पर हो रही है सुनवाई
पीठ अनिल कुमार यादव नामक
वकील द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। हालंकि पीठ ने इस पर अपना
फैसला सुरक्षित रख लिया है कि लेकिन फिलहाल इस दुर्घटना में मारे गए युवकों
के परिजनों को चार-चार लाख रुपये देने का आदेश दिया है। वहीं गंभीर रूप से
घायल लोगों को दो-दो लाख रुपये और सामान्य रूप से घायल लोगों को 50-50
हजार रुपये देने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया यह रकम अस्थायी
है, इसमें फेरबदल संभव है।
साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, रेलवे
और आईटीबीपी को तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल कर इस घटना में मारे या
घायल हुए लोगों के नाम और उसकेबारे में जानकारी देने के लिए कहा है। पीठ ने
यह भी बताने के लिए भी कहा कि इस फुटओवर ब्रिज समेत अन्य फुट ओवर बिज्र को
हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
पीठ ने सरकार को यह भी बताने के
लिए कहा कि इस घटना से सबक लेते हुए क्या कोई योजना बनाई गई है या बनाई
जानी है जिससे कि भविष्य में इस तरह की कोई घटना न हो।