उत्तराखंड की आपदा ने पूरे देश को दहला दिया है। कोई राज्य ऐसा नहीं है, जहां के लोग केदारघाटी और रुद्रप्रयाग में आपदा के शिकार नहीं हुए। हजारों की तादाद में तीर्थयात्री अब भी फंसे हैं।
ऐसे में तबाही का नजारा देखने आने वाले वीवीआईपी की वजह से राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा। प्रशासन के अधिकारी काम नहीं कर पा रहे।
वीवीआईपी की सुरक्षा और जी-हुजूरी के चक्कर में आपदा पीड़ितों के परिजनों से बदसुलूकी हो रही है।
सोनप्रयाग के पास वीवीआईपी के काफिले के कुछ लोगों के पिछड़ जाने पर राहत कार्य रोक दिया गया। फोन पर एक पूर्व मुख्यमंत्री बार-बार प्रशासनिक और पुलिस अफसरों को लताड़ रहे थे।
आपदा में घायल एक टैक्सी ड्राइवर मनोहर ने बताया कि इस पर गुस्साए पुलिसकर्मी ने वायरलैस सेट जमीन पर दे मारा।
गौरीकुंड में तबाही का नजारा देखने आए वीआईपी हेलीकॉप्टर देखकर झारखंड की यात्री रामदेवी समझी कि राहत कार्य वाले हैं। हेलीकॉप्टर के विंग की हवा से उड़ी टिन उसकी छाती में धंस गई और बेहोश होकर लुढ़क गई।
आईएमए के प्रदेश सचिव डा. डीडी चौधरी ने बताया कि टिन लगने से बेहोश महिला का फौरन इलाज किया गया। उसे किसी तरह बचाया गया।
वीवीआईपी की आवाजाही के चक्कर में सहस्त्रधारा हेलीपेड और जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर आपदा पीड़ितों के परिजनों से बदसुलूकी की गई।
इस पर अपने पीड़ितों के आक्रोशित परिजनों ने सोमवार को ऋषिकेश मार्ग पर जाम लगा दिया था।
पीड़ितों के परिजनों का कहना है कि हवाई दौरा करके आपदा प्रभावित क्षेत्र देख लेने से क्या होगा? ऊपर से तो लाशें भी ढंग से नजर नहीं आएंगी। लेकिन इनको भी शर्म नहीं आती।
आला प्रशासनिक अफसरों ने बताया कि एक अधिकारी को प्रोटोकॉल में लगाना पड़ता है। इसके अलावा कई वाहन इनके काफिले में लगाने पड़ते हैं।
पीड़ितों को बचाने के बजाए सारा ध्यान इन वीवीआईपी पर चला जाता है। कहीं ऊंचा-नीचा हो गया तो और आफत। ढंग से काम नहीं हो पाता है।