आयकर विभाग ने भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के पूर्ति ग्रुप में पिछले दो वर्षों के दौरान करीब सात करोड़ की टैक्स चोरी का आकलन किया है।
पूर्ति पावर एंड शुगर लिमिटेड (पीपीएसएल) पर आर्थिक लेन देन में गड़बड़ी के आरोपों की जांच पिछले साल से चल रही है। इसी मुद्दे पर गडकरी अपनी अध्यक्ष पद की कुर्सी गंवा चुके हैं। और उन्हें पार्टी ने दोबारा अध्यक्ष भी नहीं बनाया।
विभाग ने अपनी जांच के दौरान आकलन लगाया है कि पिछले दो वित्तीय वर्ष के दौरान ग्रुप में करीब 7 करोड़ रुपए का टैक्स नहीं दिया गया।
पूर्ति ग्रुप ने हालांकि कहा है कि उसे इस तरह के आकलन और गड़बड़ी के संबंध में किसी तरह का नोटिस विभाग की तरफ से नहीं मिला है। और वैसे नोटिस किसी तरह की गड़बड़ी का सूचक भी नहीं है।
ग्रुप ने कहा कि गडकरी पिछले दो साल से ग्रुप से अलग हैं। मीडिया में आयकर विभाग की तरफ से टैक्स चोरी के संबंध में ग्रुप को नोटिस मिलने की खबर है।
इस पर ग्रुप के पीआरओ नितिन कुलकर्णी ने कहा कि पूर्ति ग्रुप और उससे संबंधित किसी भी कंपनी को इस तरह का नोटिस नहीं प्राप्त हुआ है। अगर किसी प्रकार की नोटिस मिलेगी तो हमारे एमडी सुधीर दिवे कंपनी के कर सलाहकारों से बातचीत कर उसका उचित जवाब देंगे।
कर आकलन की नोटिस एक नियमित प्रक्रिया होती है। इसे गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्ति ग्रुप पर विभिन्न स्तरों पर आरोप हैं, जिनका उचित जवाब दिया जाएगा।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि पूर्ति ग्रुप से संबंधित सभी कंपनियों के आर्थिक लेन देन का आकलन और वित्तीय गड़बड़ी की जांच वर्ष के अंत तक पूरी हो सकेगी।
कर चोरी की आकलन रिपोर्ट आयकर विभाग की मुंबई, पुणे और नागपुर यूनिट द्वारा जांचें गए कंपनी के दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। पिछले साल आयकर विभाग ने पूर्ति ग्रुप के कई ठिकानों पर छापे भी मारे थे।