केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष कार्यक्रम में ग्लोबल लीडर बनने की कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया है। इस बाबत निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
संसदीय समिति ने भी इसकी सिफारिश की थी। इसी क्रम में भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संस्थान (इसरो) 18 नए देसी-विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण की तैयारी में जुटा है। इस साल पहले ही संचार उपग्रह जीसैट 6 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया जा चुका है।
इसरो तेजी से स्वदेशी की तरफ कदम बढ़ा रहा है। अपने इस मिशन के तहत संस्थान ने सिस्टम इंजीनियरिंग अध्ययन, डिजाइन, विकास, क्वालिटी और प्रोजेक्ट प्रबंधन में स्वदेशी संसाधनों का इस्तेमाल किया है। अब इससे आगे अंतरिक्ष कार्यक्रम में स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योगों की मदद ली जा रही है।
सूत्रों के अनुसार अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े हार्डवेयर, साफ्टवेयर और परीक्षण प्रणाली में भारतीय उद्योगों की भूमिका और बढ़ाई जाएगी। अंतरिक्ष विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष इको सिस्टम के लिए भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहित करने को दीर्घकालिक नीति पर काम शुरू किया है।
इन उपग्रहों पर चल रहा काम
इसरो एक और संचार उपग्रह तथा नेविगेशन सैटेलाइट आईआरएनएसएस-आईई और आईआरएनएसएस-आईएफ की लांचिंग की तैयारी कर रहा है।
अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित सैटेलाइट एसट्रोसेट पर भी काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त इसरो द्वारा चार देशों के 13 उपग्रह भी प्रक्षेपित किए जाने हैं। इसमें इसरो के पीएसएलवी की भूमिका होगी। अंतरिक्ष विभाग की वाणिज्य इकाई एनट्रिक्स ने रिमोट सेंसिंग डाटा के लिए ग्लोबल मार्केटिंग शुरू कर दी है।
15 लांचर विकसित करेगा इसरो
इसरो ने 2017 तक 15 लांचर विकसित करने की योजना बनाई है। इसमें 10 पीएसएलवी लांचर और एक जीएसएलवी एमके थर्ड होगा। इसके लिए 3090 करोड़ रुपये की राशि मंजूर हो गई है।