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आईएसआई जासूसी कांड: राइफल मैन सिलीगुड़ी से गिरफ्तार

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को एक और सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस ने पांचवें आरोपी को सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया है। आरोपी आर्मी का राइफलमैन है।
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मामले में आर्मी से यह दूसरी गिरफ्तारी है, जबकि  रैकेट से जुड़ी पांचवीं गिरफ्तारी। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार आरोपी शिक्षक मोहम्मद साबिर और सेना से रिटायर हवलदार मुनव्वर अहमद मीर को पुलिस टीम रविवार तड़के दिल्ली लेकर पहुंची।

अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि गिरफ्तार राइफल मैन का नाम फरीद खान उर्फ सर्जन है। वह सेना सिलगुड़ी में लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट में तैनात है। 2014 में जब फरीद खान जम्मू-कश्मीर में तैनात था, तब गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद साबिर ने उसकी मुलाकात कफायतुल्ला से कराई थी। फरीद खान कई वर्षों से कफायतुल्ला को सेना केगोपनीय दस्तावेज व गोपनीय सूचना दे रहा था। कफायतुल्ला से पूछताछ में फरीदखान का नाम सामने आया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम सिलीगुड़ी रवाना हुई। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस टीम सोमवार को आरोपी को लेकर दिल्ली पहुंचेगी।
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चार दिन पहले सेना ने लिया था हिरासत में

दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार आरोपी शिक्षक मोहम्मद साबिर और आर्मी के रिटायर हवलदार मुनव्वर को पुलिस टीम रविवार तड़के दिल्ली लेकर पहुंची। दोनों आरोपियों को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है।

रिमांड खत्म होने पर दोनों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। मालूम हो कि जासूसी रैकेट में फरीदखान से पहले दिल्ली से कफायतुल्ला, जम्मू-कश्मीर से बीएसएफ का हवलदार अब्दुल रशीद, शिक्षक मोहम्मद साबिर और सेना का रिटायर हवलदार मुनव्वर अहमद गिरफ्तार हो चुके हैं।

अपराध शाखा के एक वरिष्ष्ठ अधिकारी ने बताया कि जासूसी रैकेट में राइफलमैन फरीद खान का नाम सामने आने के बाद सेना को इसकी जानकारी दी गई। सेना ने आरोपी फरीद खान को करीब चार दिन पहले हिरासत में ले लिया था और अपने स्तर पर जांच शुरू की। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद आरोपी को दिल्ली पुलिस को सौंपा गया।

गिरफ्तार आर्मी के राइफलमैन का कोड नेम सर्जन है। रैकेट में शामिल लोग उसे सर्जन के नाम से ही बुलाते थे। दिल्ली पुलिस ने कफायतुल्ला से जो सीडी बरामद की है, उससे इसके सबूत मिले हैं। सीडी में जासूसों की बातचीत की रिकॉर्डिंग है। कोड वर्ड में बात करते हुए बार-बार सर्जन शब्द का जिक्र किया गया है। रैकेट में ज्यादातर लोग एक-दूसरे से कोड नेम में ही बात करते थे।
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