आतंक रोधी बल एनएसजी के एक अधिकारी के पास पाकिस्तान से किए गए आईएसआई एजेंट के फोन कॉल के मामले में गंभीर सुरक्षा एजेंसियां इंटरनेट टेलीफोन सुविधा बंद कराने के पक्ष में हैं।
इस अधिकारी पर हैदराबाद ब्लास्ट के संबंध में बिना आदेश लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से बातचीत करने का आरोप है।
हालांकि इस बातचीत को किसी तरह का खतरा नहीं माना जा रहा है, लेकिन इस घटना से इस बात पर बहस तेज हो गई है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए और किनका नहीं।
सूत्रों के अनुसार आईएसआई एजेंट और पाक अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों के लिए वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) कॉल काफी अहम साबित हो सकती है। सुरक्षा की दृष्टि से गैर पंजीकृत वीओआईपी या इंटरनेट टेलीफोन सुविधा का इस्तेमाल बड़ी समस्या है।
क्योंकि इसमें कॉल करने वाले व्यक्ति का स्थान और समय की तुरंत पहचान नहीं की जा सकती। इसे देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां दूरसंचार विभाग पर इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए जोर डाल रही हैं।
इसे लेकर दूरसंचार विभाग, नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के बीच कई दौर की बैठकें भी की जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है।
खास बात यह है कि इस तरह की वीओआईपी कॉल का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में धड़ल्ले से किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार लश्कर-ए-ताइबा का कश्मीरी कमांडर फुरकान (कोडनेम) साथी आतंकियों से नियमित रूप से वीओआईपी तकनीक से बात करता है।
कुछ दिन पहले हुई इस घटना की जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। सेना का मेजर रैंक का यह अधिकारी डेपुटेशन पर एनएसजी में है और फिलहाल इसकी आतंकी रोधी इकाई ब्लैक कैट्स में तैनाती है। एनएसजी के प्रमुख अरविंद रंजन ने इस बात से इनकार किया कि इस बातचीत में कोई संवेदनशील जानकारी साझा की गई।