इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर के सात आरोपियों में से एक आईपीएस अधिकारी जी एल सिंघल की निजी जिंदगी में हुए एक पारिवारिक हादसे ने सीबीआई की जांच को निर्णायक मोड़ दे दिया।
इस हादसे के परिणामस्वरूप जिंदगी से मायूस सिंघल ने वह ऑडियो सीडी एसआईटी और सीबीआई के सुपुर्द कर दी, जिसमें आईबी अधिकारी राजेंद्र कुमार की डीजी बंजारा और अन्य की सांठगांठ के सटीक सुबूत हैं। इस सीडी के हाथ लगते ही सीबीआई ने राजेंद्र के खिलाफ अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी थी।
सीबीआई के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस सीडी के आधार पर की गई जांच से यह साफ हो गया कि राजेंद्र कुमार इस फर्जी एनकाउंटर का असली मास्टर माइंड था। साथ ही यह भी साफ हो गया कि बंजारा पूरी स्क्रिप्ट का सबसे शैतान किरदार है।
जानिए, क्या है इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर केस?
सीबीआई ने राजेंद्र और बंजारा के इस रोल की चर्चा बुधवार को दायर पहली चार्जशीट में की है। सूत्रों के मुताबिक जब सिंघल इसी मामले में जमानत मिलने से पहले जेल में थे, उसी दौरान एक पारिवारिक घटना ने उनका हृदय परिवर्तन कर दिया।
सिंघल ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपना बयान भी दर्ज कराया है, जो अपने आप में पुख्ता सुबूत है। हालांकि सीबीआई ने चार्जशीट में सिंघल को गवाह के बजाए आरोपी बनाया है। सीबीआई की योजना है कि उन्हें बाद में सरकारी गवाह बना दिया जाएगा।
मोदी को मारने नहीं आए थे इशरत और उसके साथी
चार्जशीट के मुताबिक गुजरात हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की तहकीकात के दौरान एनकाउंटर की सच्चाई को दबाने की लगातार कोशिश भी की जाती रही।
सीबीआई ने जिक्र किया है कि 2010 में इस मामले का खुलासा करने वाले कांस्टेबल मोती देसाई आईजीपी मोहन झा के दबाव में ही हाईकोर्ट में अपने बयान से मुकर गया था।
संभव है कि 26 जुलाई को दर्ज होने वाली दूसरी चार्जशीट में सीबीआई राजेंद्र कुमार और आईबी के तीन अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाने के साथ झा के रोल की भी विस्तारपूर्वक चर्चा करे।