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इशरत जहां मामले की जांच से खुलेंगे नए राज

Mon, 01 Jul 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
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इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ कांड की जांच की सुई जिस दिशा में जा रही है उससे देश में एक बड़ा सियासी बवंडर पैदा हो सकता है।
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इशरत जहां फर्जी पुलिस मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच की सुई पूरी तरह आईबी के वरिष्ठ अधिकारी राजेंद्र कुमार की भूमिका पर टिकी है।

इसे लेकर जहां गृह मंत्रालय, आईबी और सीबीआई में ठनी हुई है, वहीं सूत्रों का कहना है कि अगर जांच सही दिशा में आगे बढ़ी तो न सिर्फ इशरत जहां बल्कि गुजरात के पूर्व मंत्री हिरेन पंड्या हत्याकांड, सोहराबुद्दीन, कौसर बी और तुलसी प्रजापति मुठभेड़ कांड में भी नए राज खुल सकते हैं।

इसे लेकर कांग्रेस भाजपा और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और महासचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी अमित शाह को घेरने की तैयारी में है।

सूत्रों के मुताबिक हालात को भांप कर जहां भाजपा ने इशरत मामले की जांच को मोदी के खिलाफ कांग्रेस की सियासी साजिश बताते हुए अपने हमले तेज कर दिए हैं, वहीं खुद मोदी भी कानूनी और सियासी चक्रव्यूह से बचने के लिए हर तरह की राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी तैयारियों में जुटे हैं।
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विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सीबीआई द्वारा इस दावे कि उसके पास मुख्यमंत्री निवास के टेलीफोन से मुठभेड़ को अंजाम देने वाले पुलिस अधिकारियों से उसी दिन कई बार हुई बातचीत का रिकॉर्ड है, के बाद हाल ही में उनके विश्वस्त लोगों ने कुछ साइबर विशेषज्ञों से इसके बचाव के उपाय को लेकर मशविरा भी किया।

सीबीआई सूत्रों के हवाले से यह खबरें भी आ रही हैं कि मुठभेड़ में मारे गए एक कथित आतंकवादी ने हरेन पंड्या हत्याकांड के बारे में सीबीआई और गुजरात पुलिस को बेहद अहम सुराग दिए थे।

इस हत्याकांड की साजिश में जिन लोगों को गिरप्तार किया गया था वह सब अदालत से दोष मुक्त हो चुके हैं।

हाल ही में पंड्या की पत्नी जागृति पंड्या ने उनसे जेल में जाकर मुलाकात भी की थी। जागृति ने अपने पति की हत्या की जांच दोबारा शुरु कराने की मांग की है। अगर सीबीआई यह जांच दोबारा शुरु करती है तो मोदी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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सीबीआई सूत्रों का यह भी कहना है कि गुजरात में हुए तमाम फर्जी मुठभेड़ों के तार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, क्योंकि इन्हें अंजाम देने वाले कुछ पुलिस वाले समान हैं और यह मुठभेड़ें आईबी अधिकारी राजेन्द्र कुमार की सुरागकशी से ही की गईं।
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