इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में खुफिया एजेंसी (आईबी) के विशेष निदेशक राजेंद्र कुमार के लिए गृह मंत्रालय का दबाव नहीं बल्कि कानून की तकनीकी बारीकियां फिलहाल सहायक साबित हो रही हैं।
इन्हीं तकनीकी वजहों से अब तक राजेंद्र के खिलाफ पुख्ता सबूतों का दावा कर रही सीबीआई ने पहली चार्जशीट में उनका नाम नहीं डालने का फैसला किया है।
सीबीआई के मुताबिक पहली चार्जशीट में नाम नहीं होने का यह मतलब नहीं लगाना चाहिए कि राजेंद्र कुमार एजेंसी के शिकंजे के बाहर निकल गए।
इशरत जहां: आईपीएस पांडे को बड़ा झटका
सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने सोमवार को साफ किया कि एजेंसी ने गुजरात हाईकोर्ट को चार जुलाई तक चार्जशीट दायर करने का वादा किया था। यही वजह है कि इस पहली चार्जशीट में गुजरात पुलिस के उन आरोपियों का ही नाम होगा जो कथित रुप से एनकाउंटर में सीधे तौर पर शामिल थे।
सिन्हा के मुताबिक इस फर्जी एनकाउंटर की साजिश की जांच चल रही है जो चार्जशीट दायर करने तक पूरी नहीं हो पाएगी।
सीबीआई के शीर्षस्थ सूत्रों ने बताया कि इस मामले में गृह मंत्रालय और आईबी के दखल के बाद यह करार हुआ था कि राजेंद्र कुमार को रिटायमेंट से पहले गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
क्या है ये इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर प्रकरण
राजेंद्र कुमार पर मामला भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत नहीं बल्कि सीआरपीसी के तहत अपराध का बनता है। नियम के मुताबिक अगर मामला सीआरपीसी का है तो अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई के लिए उसकी रिटायरमेंट के बाद भी सरकार की अनुमति की जरूरत होगी।
इसी तकनीकी पेंच का फायदा उठाकर गृह मंत्रालय ने अदालत में राजेंद्र के खिलाफ सीबीआई कार्रवाई का विरोध करने का फैसला कर रखा है।
सूत्रों की मानें तो गृह मंत्रालय ने राजेंद्र कुमार को सलाह दी है कि इसी आधार पर वह सीबीआई की कार्यवाही को चुनौती देने को तैयार रहे।
इसी वजह से अगर अतिरिक्त चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया जाता है, तो वह इस फैसले को चुनौती देंगे। हालांकि सीबीआई के पास वह तकनीकी आधार मौजूद है, जिसके तहत राजेंद्र पर कार्रवाई के लिए सरकार की अनुमति की जरूरत ही नहीं।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इस मामले को इन तकनीकी पेंच में नहीं फंसाना चाहती। सीबीआई इसी साजिश के मामले में गुजरात के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह से भी पूछताछ की योजना बना रही है।