इशरत जहां ‘फर्जी’ एनकाउंटर मामले में गृह मंत्रालय सीबीआई को अपने पास मौजूद सभी दस्तावेज देने को तैयार नहीं है।
मामले की जांच कर रही सीबीआई ने गृह मंत्रालय से गुजरात हाईकोर्ट में दायर विरोधाभासी बयानों से जुड़ी फाइलें मांगी थी।
मगर सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर गृह मंत्रालय इस केस से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई को नहीं सौंपना चाहता और इससे बचने के लिए वह कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकता है।
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने इस संबंध में कानून मंत्रालय से पूछा है कि क्या सीबीआई द्वारा मांगी गई जानकारी इस केस में उपयोगी है या नहीं। इसके बाद ही एजेंसी को जवाब भेजा जाएगा।
अगर जरूरत पड़ी तो गृह मंत्रालय कोर्ट की शरण ले सकता है क्योंकि उसका मानना है कि इन जानकारियों को सार्वजनिक करना देश की सुरक्षा के हित में नहीं है, इसलिए उन्हें इससे छूट मिलनी चाहिए।
हालांकि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
6 अगस्त, 2009 को गुजरात हाई कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया गया था, उसमें इशरत और अन्य तीन को आतंकी ठहराया था जबकि 30 सितंबर, 2009 को मंत्रालय ने दावा किया था कि ऐसे कोई सुबूत नहीं हैं, जिससे इशरत के आतंकी होने की पुष्टि हो सके।