इशरत जहां ‘फर्जी’ एनकाउंटर की सच्चाई तलाशने में जुटी सीबीआई को बुधवार को निराशा हाथ लगी।
सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में अहम साबित हो सकने वाले अतिरिक्त डीजीपी पीपी पांडे को न्यायिक हिरासत में भेजने संबंधी याचिका को खारिज दिया।
एक दिन पहले ही गुजरात हाईकोर्ट ने 6 अगस्त तक पांडे की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और साथ ही सीबीआई कोर्ट को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह पांडे की अग्रिम याचिका पर फिर से सुनवाई करे।
इसके अलावा पांडे को भी एसीजीएम के समक्ष रोज पेश होने का भी आदेश दिया गया था।
सीबीआई की अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर ही पांडे को न्यायिक हिरासत में लेने की मंजूरी नहीं दी और कहा कि इस स्तर पर यह संभव नहीं है।
इससे पहले सीबीआई की वकील अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि सीबीआई कोर्ट ने पांडे को फरार घोषित किया है और इसलिए इस सीनियर अधिकारी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाना चाहिए।
जबकि पांडे के वकील निरुपम नानावटी ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश पूरी तरह स्पष्ट है और अगर आवेदक को न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है, तो हाईकोर्ट का आदेश निष्क्रिय हो जाएगा।
बुधवार को पांडे कोर्ट में व्हील चेयर पर पेश हुए।