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भारतीयों को ही आत्मघाती हमलावर क्यों बनाता है IS?

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अपनी क्रूर वारदातों से दुनियाभर में सुर्खियां हासिल कर चुका आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट (आईएस) भारतीय मुसलमानों को अरब नागरिकों के मुकाबले दोयम दर्जे का मानता है। भारतीयों समेत दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी युवकों को बेहतरीन लड़ाका नहीं मानने के चलते आईएस इनका इस्तेमाल आत्मघाती हमलावर के रूप में करता है। इसी मान्यता के चलते आतंकी गुट में शामिल हुए 23 भारतीयों में से 6 को आत्मघाती हमलावर बनाया गया और इनकी मौत हो चुकी है। इनमें आजमगढ़ का 30 वर्षीय मोहम्मद साजिद भी शामिल है।
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खुफिया एजेंसियों के आंकलन के मुताबिक, अन्य 17 भारतीय अब भी आईएस के लिए लड़ रहे हैं। इनका पता लगाया जा रहा है। इन युवकों के परिजन खुफिया एजेंसियों के संपर्क में हैं। विदेशी खुफिया एजेंसियों से केंद्र सरकार को मिली जानकारी के मुताबिक, आईएस में भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान से शामिल हुए युवकों को अरब लड़कों के मुकाबले दोयम दर्जे का समझा जाता है। इसलिए इनका इस्तेमाल आत्मघाती दस्ते और हमले में आगे की पंक्ति में किया जाता है। भारतीय खुफिया एजेंसी के मुताबिक यही वजह है कि भारत के 23 युवकों में छह मौत के घाट उतर चुके हैं।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इन युवकों को अलग अलग लक्ष्यों पर विस्फोटक से भरी गाड़ी में भेजा गया। सीरिया और इराक में अपने दुश्मनों के लक्ष्य पर पहुंच कर इन्हें मोबाइल से अपने आका को फोन करने का निर्देश था लेकिन इन्हें मालूम नहीं था कि उस फोन में ही गाड़ी में भरे विस्फोटक का ट्रिगर है। फोन मिलाते ही पूरी गाड़ी धमाके की भेंट चढ़ जाती है। सूत्रों के मुताबिक, आईएस इन आत्मघाती मिशन में दक्षिण एशिया और अफ्रीका के नाइजीरिया और सूडान जैसे देशों से शामिल हुए लड़कों का ही इस्तेमाल करते हैं।
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इंटरनेट के जरिए करते हैं संपर्क

विदेशी और भारतीय खुफिया एजेंसियों की इकट्ठा की गई रिपोर्ट के मुताबिक आईएस का नेतृत्व मानता है कि भारत, पाकिस्तान और बंाग्लादेश के मुसलमान कुरान और हदीस के असल उद्देश्य के भटक गए हैं। इसलिए इन देशों के युवक सलाफी जिहाद के प्रति पूरी तरह समर्पित नहीं हो पाते। सूत्रों ने बताया कि आईएस में शामिल होने के बाद इन्हें इस्लाम के नाम पर कथित जिहाद का नया पाठ पढ़ाया जाता है। जो लड़के वेबसाइट के प्रचार के जरिये आकर्षित होकर वहां पहुंचते हैं, सबसे पहले उनका पासपोर्ट नष्ट कर दिया जाता है। इसके अलावा उन्हें सिखाया जाता है कि अगर वह भाग कर अपने देश गए तो जिन्न ताउम्र उनका पीछा नहीं छोड़ेगा। जिन्न इस्लामी मिथक का एक हिस्सा है।
 
सूत्रों के मुताबिक, आईएस अरब युवकों को उच्च कोटि का लड़ाका मानते हुए उन्हें लंबी लड़ाई के लिए बचा कर रखता है। इनमें ट्यूनीशिया, फलस्तीन, सऊदी अरब, इराक और सीरिया के लड़के शामिल हैं। इन्हें पगार दक्षिण एशियाई लड़कों के मुताबिक ज्यादा मिलती है। इतना ही नहीं इन्हें लुभाने के लिए जिहादी पत्नी का भी इंतजाम है लेकिन आईएस में शामिल महिलाओं पर भी अरब के युवकों का ही पहला अधिकार होता है। नेतृत्व का मानना है कि अरब युवकों के बच्चे ज्यादा मजबूत और सख्त होंगे जिन्हें भविष्य का लड़ाका बनाया जाएगा।

आईएसआईएस के कथित जेहाद में मारे गए भारतीय युवक -
- आतिफ असीम मोहम्मद (25), पिता- मो अलीम, 12-28 गौतमी नगर, मनचेरियल, आदिलाबाद, तेलंगाना
- मो. उमर सुभान, पिता- मो अब्दुल सुभान, 25-5बी, हॉस्पीटल रोड, शिवाजी नगर, बंगलूरू
- मौलाना अब्दुल कादिर सुल्तान अरमार (29), पिता- अबु बकर अरमार, फातिमा मंजिल, आजाद स्ट्रीट, मकदूम कालोनी, भटकल, कर्नाटक
- शाहीन फारूक टंकी (26),  पिता- फारूक गुलाम हाफिज टंकी, 6-57, दूध नाका, जामा मस्जिद, गली बंदर, कल्याण, थाणे
- फैज मसूद (28), पिता- मसूद अली, 6-4, 1 क्रास, डीकोस्टा लेआउट, कूके टाउन, बंगलूरू
- मोहम्मद साजिद (30), पिता- कुरैशान, संजरपुर, सराय मीर, आजमगढ़, यूपी
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आईएस ने कहा, लश्कर पाक सेना का पिट्ठू

कश्मीर में अपनी पैठ बनाने के लिए आईएस ने लश्कर ए ताइबा पर हमला बोला है। आईएस ने लश्कर को पाकिस्तानी सेना का पिट्ठू करार दिया है। उसका कहना है कि यह दुश्मन पर लगातार और बेरहम हमले करने की बजाय धर्मभ्रष्ट पाक सेना के इशारे पर वहां काम कर रहा है। वहीं दूसरी ओर लश्कर में आईएस की किसी भी तरह की मौजूदगी को सिरे से खारिज कर दिया है। दोनों आतंकी गुटों की बयानबाजी को हाल के दिनों में कश्मीरी युवकों में आईएस के प्रति बढ़ते आकर्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।
 

दहशत का दोहरापन

-अग्रिम पंक्ति में रखा जाता है  ताकि हमला होने पर उनकी नजर में बेहतर लड़ाके न मारे जाएं
-पूरी रणनीति नहीं बताई जाती, धोखे से गाड़ी में भरे विस्फोटक का ट्रिगर दबवाया जाता है
-अरबों को उच्च कोटि का लड़ाका मानते हुए उन्हें लंबी लड़ाई के लिए बचाकर रखा जाता है
-दक्षिण एशिया से गए युवकों को अरबों की तुलना में कम पगार दी जाती है
-आईएस की महिलाओं से शादी में अरबों युवकों को प्राथमिकता मिलती है

ऐसा इसलिए है क्योंकि आईएस की नजर में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमान कुरान और हदीस के असल उद्देश्य के भटक गए हैं। इसलिए इन देशों के युवक सलाफी जिहाद के प्रति पूरी तरह समर्पित नहीं हैं।
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