क्या शीना वोरा हत्याकांड के मामले में मुंह बंद रखने के लिए इंद्राणी के पूर्व पति संजीव खन्ना को मोटी रकम मिली थी। जांच के दौरान इस तथ्य का खुलासा हुआ है कि वर्ष 2012 में शीना की हत्या के कुछ दिनों बाद संजीव को मोटी रकम मिली थी।
संजीव से पूछताछ के दौरान मौजूद कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। इस बात का पता चलने के बाद पुलिस अब संजीव के बैंक खातों के पिछले दो सालों के दौरान किए गए लेनदेन का ब्योरा खंगालने पर विचार कर रही है।
इस बीच, पुलिस इस थ्योरी को लेकर भी आगे बढ़ रही है कि कहीं संजीव ने शीना की हत्या में शामिल होने के लिए इस वजह से हामी तो नहीं भरी थी कि शीना उसकी और इंद्राणी की बेटी विधि को पसंद नहीं करती थी।
यूं बना रिश्ता
दूसरी तरफ, संजीव और इंद्राणी के पारिवारिक मित्रों के जरिये इंद्राणी
के चरित्र के नये पहलू भी सामने आने लगे हैं। संजीव महानगर के प्रतिष्ठित
कलकत्ता क्रिकेट एंड फुटबाल क्लब (सीसीएफसी) का सदस्य था और उसकी शामें
अक्सर वहीं कटतीं थीं।
शादी के बाद इंद्राणी भी नियमित रूप से क्लब जाने
लगी। कॉलेज में संजीव के सहपाठी और पारिवारिक मित्र रहे विंग कमांडर डीजी
क्लेयर बताते हैं कि इंद्राणी शुरू से ही बेहद महत्वाकांक्षी थी। उसके सपने
ऊंचे थे और वह लंबी उड़ान भरना चाहती थी।
पारिवारिक मित्रों के साथ बातचीत
में वह अपनी इस महत्वाकांक्षा को छिपाने का कोई प्रयास नहीं करती थी।
संजीव उसके लिए पार्टियों में जाने और ऊंची सोसाइटी में पहुंच बनाने की
सीढ़ी भर था। क्लेयर बताते हैं कि संजीव व इंद्राणी की मुलाकात वर्ष 1993
में एक कंप्यूटर क्लास में हुई थी।
तलाक के बाद टूट गया संजीव
तब इंद्राणी कुछ दिनों पहले ही गुवाहाटी
से कोलकाता आई थी और वाईएमसीए हॉस्टल में रहती थी। उन दोनों का प्रेम
परवान चढ़ने के कुछ दिनों के भीतर ही शादी हो गई।
उस समय संजीव अपनी विधवा
मां के साथ मामा के घर रहता था, लेकिन शादी के बाद वह इंद्राणी के साथ
हावड़ा के शिवपुर इलाके में एक फ्लैट में रहने चला गया।
कुछ दिनों बाद
इंद्राणी ने एक प्लेसमेंट एजेंसी खोल ली और शीघ्र महानगर की पार्टियों का
एक जाना-पहचाना चेहरा बन गई। संजीव के मित्रों का कहना है कि वह एक
जिंदादिल व्यक्ति था, लेकिन इंद्राणी से तलाक के बाद वह टूट गया था।
अब वो मंत्री ही मुझे बचा सकता है
इंद्राणी बेटी विधि को साथ लेकर मुंबई चली गई थी। वह संजीव को उससे नहीं
मिलने देती थी। मित्रों के मुताबिक, संजीव का व्यवहार दोस्ताना था। फेसबुक
पर उसके मित्रों की तादाद (1296) भी इस बात पर मुहर लगाती है।
संजीव को
शायद पहले से ही अपने फंसने का एहसास हो गया था। 20 अगस्त को उसने अपने कई
मित्रों से कहा था कि वह एक मामले में गंभीरता से फंस गया है और अब केंद्र
सरकार के एक ताकतवर मंत्री ही उसे बचा सकते हैं।
संजीव उस मंत्री का मित्र
होने का दावा करता था, लेकिन दोस्तों ने समझा कि संजीव शराब के नशे में
अनाप-शनाप बोल रहा है।