सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की गिरफ्तारी का आदेश देकर पाकिस्तान सरकार की चूलें हिला दी हैं, ऐसे में मौलवी डॉ. मोहम्म्द ताहिर उल कादरी का उभार सियासी बवंडर जैसा है, इसमें सरकार ही नहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के भी तबाह होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
ताहिर उल कादरी के नेतृत्व में हजारों लोगों ने पाक संसद को घेर रखा है। वे चुनाव सुधारों और संसद, विधान सभाओं को भंग करने की मांग कर रहे हैं लेकिन मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों की बीच उनकी मुहिम को लेकर तमाम आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उन्हें पाकिस्तान का नया ड्रोन और सेना का मोहरा तक कहा जा रहा है। हालांकि हमारी मीडिया में उनकी तुलना भारत के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के अगुआ अन्ना हजारे से की जा रही है।
ताहिर उल कादरी का नारा है,' देश को बचाइए, राजनीति को नहीं'। विश्लेषकों का मानना है कि कादरी पाकिस्तान की राजनीति की गंदगी को खत्म करने के नाम पर लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं। पाकिस्तान में सैन्य शासक ऐसे मोहरों का इस्तेमाल पहले भी करते रहे हैं। फिर भी कादरी का उभार बहुतों को चौंका रहा है। ये सवाल आम तौर पर पूछा जा रहा है कि ताहिर उल कादरी हैं कौन?
कौन हैं ताहिर उल कादरी
ताहिर उल कादरी पाकिस्तानी कानूनी के विद्वान और शिया धार्मिक नेता हैं। वे साल 2005 से कनाडा में रह रहे हैं और लगभग सात साल के बाद पाकिस्तान लौटे हैं। कनाडा में वे सामाजिक संगठन 'मिनहाजुल कुरान इंटरनेशनल' का संचालन करते हैं। कादरी के मुताबिक उनका संगठन दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में शैक्षणिक और जन-कल्याणकारी गतिविधियों में शामिल है। सीएनएन-आईबीएन ने उन्हें पिछले वर्ष 'अंतरराष्ट्रीय शांति दूत' के खिताब से नवाजा था।
19 फरवरी 1951 को जन्मे कादरी ने लॉ की पढ़ाई पंजाब (पाकिस्तानी पंजाब) यूनिवर्सिटी से की और वहीं प्रोफेसर भी रहे। 1981 में उन्होंने एक सूफी संगठन 'मिनहाजुल कुरान इंटरनेशनल' की स्थापना की। ये संगठन सामाजिक, शैक्षणिक और जन-कल्याणकारी गतिविधियों में शामिल है। कादरी ने मिनहाज यूनिवर्सिटी और चैरिटी संगठन मिनहाज वेल्फेयर फाउंडेशन की स्थापना भी की है। वे पाकिस्तान के राजनीतिक दल 'पाकिस्तान अवामी तहरीक' के संस्थापक चेयरमैन भी हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों से वे राजनीति में सक्रिय नहीं हैं।
कादरी दुनिया भर में इस्लाम में शांति, एकता और मानवाधिकार के मुद्दे पर भाषण देते रहे हैं। वे 2010 में एकाएक तब चर्चा में आए, जब उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ फतवा दिया। उनके इस कदम की दुनिया भर में सराहना हुई थी। अमेरिका ने कहा था कि कादरी ने इस्लाम को आतंकवाद से अलग करने का काम किया है।
भारत भी आ चुके हैं कादरी
ताहिर-उल-कादरी ने पिछले वर्ष भारत की भी यात्रा की थी। इस यात्रा में उन्होंने दिल्ली में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ए रहमान खान, पूर्व रेल मंत्री सी के जाफर शरीफ और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस मारकंडेय काटजू जैसी चुनिंदा शख्सियतों से मुलाकात की थी। कादरी ने दिल्ली के बाद मुंबई, बंगलुरू और हैदराबाद की भी यात्रा की।
बताया जाता है कि कादरी की भारत यात्रा का मकसद पाकिस्तान के सुन्नी मुसलमानों का दबदबा झेल रहे शिया मुसलमानों के हक में समर्थन जुटाना था। भारत यात्रा के दौरान कादरी भारतीय एजेंसियों की नजर में तब आए जब 14 मार्च 2012 को मुंबई में उनकी होने वाली सभा के खिलाफ वहां की कट्टर मुसलिम संस्था रजा एकेडमी ने तीखा विरोध दर्ज किया और उसे रोकने के लिए बंबई हाईकोर्ट में याचिका तक दायर कर दी। रजा एकेडमी की शिकायत थी कि कादरी मुंबई में भड़काऊ भाषण देंगे जिससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने का खतरा है। इसके बाद बंगलूरू और हैदराबाद में उनकी गतिविधियों को सीमित रखा गया।
दिल्ली के इंडिया इस्लामिक सेंटर में उनकी नई लिखी किताब 'फतवा ऑन टेरोरिजिम एंड सोसाइड बांबिंग' के लिए सम्मानित भी किया गया था। इस सम्मेलन में सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका सादिया देह्लवी ने सूफी इस्लाम पर चर्चा की। इसी सम्मेलन में काटजू और उत्तरखंड के चीफ जस्टिस भी मौजूद थे। कादरी उर्दू, अरबी और अंग्रेजी में लगभग चार सौ किताबों का लेखन कर चुके हैं। बताया जाता है कि पाकिस्तान का विवादित 'ईश निंदा कानून' कादरी का ही बनाया हुआ है।