अपनी सियासी रैलियों में भारी भीड़ खींच रहे नरेंद्र मोदी को पीएम कुर्सी का दावेदार बनाने को लेकर यूं तो भाजपा मन बना चुकी है, लेकिन पार्टी के प्लान बी को लेकर भी कयास शुरू हो गए हैं।
दरअसल, भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ऐलान कर दिया है कि वह आगामी लोकसभा चुनावों में गांधीनगर से एक बार फिर किस्मत आजमाएंगे, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह भाजपा का प्लान बी है।
एचटी की खबर के मुताबिक अगर भाजपा पर्याप्त सीटें जीतने में नाकाम रहती है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा सहयोगियों को खींचने के लिए ऐसे चेहरे की जरूरत होगी, जो ज्यादा स्वीकार्य हो।
बदल गए मोदी के दोस्त और दुश्मन!
यह भूमिका लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के पास जा सकती है। यह कदम इसलिए उठाना पड़ सकता है, ताकि सरकार बनाने के लिए जरूरी 272 से ज्यादा सीट तक पहुंचा जा सके।
ऐसा भी कहा जा रहा है कि मोदी भी कांग्रेस को दूर रखने के लिए भाजपा की सरकार बनाने की राह में नहीं आएंगे।
पार्टी का कहना है कि फिलहाल मोदी भाजपा के लिए 272 से ज्यादा सीटें लाने से जुड़े मिशन पर हैं। हालांकि, सूत्र यह भी कह रहे हैं कि दूसरे नेता की तलाश की संभावना कम है, क्योंकि पार्टी को मोदी के तहत जीत मिलने की काफी उम्मीद है।
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हालांकि, पार्टी मीडिया में कह रही है कि चुनाव बाद मोदी को पीछे कर किसी और को आगे बढ़ाना का सवाल ही नहीं है।
भाजपा महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा, "भाजपा मोदी को पीएम बनाने के अपने वादे से पीछे नहीं हटेगी।" आरएसएस में एक पदाधिकारी ने कहा, "आपको लगता है कि मोदी के नेतृत्व में लड़ने के बाद भाजपा किसी दूसरे नेता को चुनेगी? वह विपक्ष में बैठकर दूसरों को कोशिश करन देगी, जो कामयाब नहीं होगी। भाजपा ने दिल्ली में यही किया है।"