भीषण जलसंकट से जूझते आम आदमी की पीड़ा ने सूबे के एक सीनियर आईपीएस को इतना व्यथित किया कि वह इसके समाधान में जुट गए।
खूब अध्ययन किया तो पाया कि बड़ी योजनाओं की जगह माइक्रो प्लानिंग इसके लिए कारगर हो सकती है। उनका ध्यान गांव-कस्बों से गुम हुए कुंओं की ओर गया। बस क्या था जलसंकट का हल उन्हें इन गुम कुओं में मिल गया।
उन्होंने कम लागत में गुम कुओं को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई। इसकी शुरुआत सबसे ज्यादा जलसंकट वाले इलाके बुंदेलखंड के झांसी जनपद के गांवों से की गई है।
योजना को नाम दिया गया है मिशन ‘महाइंद्रकूप’। इसके तहत गांव और कस्बों में गुम कुओं को ढूंढकर श्रमदान के जरिए जीवित किया जा रहा है।
कूड़ेदान बने कुओं को श्रमदान से कराया जीवित
अगर आज से दस साल पहले की बात करें तो हर गांव में दो-दो तीन-तीन कुएं हुआ करते थे। गांव की आधी से ज्यादा आबादी पेयजल के लिए इन्हीं कुएं पर निर्भर हुआ करती थी। फसलों की सिंचाई में भी इनका प्रयोग होता था। लेकिन अब अधिकांश कुएं खत्म हो गए हैं।
कहीं इन कुओं को कूड़ेदान बना दिया गया है तो कहीं मिट्टी डालकर पाट दिया गया। लेकिन अब इन कुओं की तलाश शुरू हो गई है। बीड़ा उठाया है एसआईटी के एडीजी महेंद्र मोदी ने।
योजना की शुरुआत कहां से हो इसके लिए मंथन किया तो सबसे पहले उन्हें यूपी के जलसंकट से पीड़ित बुंदेलखंड याद आया जहां लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए जूझ रहे हैं। मानसून भी लगातार इस इलाके से छल कर रहा है।
झांसी के गांव कंचनपुरा, रक्शा, अंबाबाई और बल्लमपुर में श्रमदान के जरिए खत्म हुए कुओं को जीवित किया गया है। यह कुएं मामूली बरसात के पानी से भी भर जाएंगे। रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम से इन कुओं को जोड़ दिया गया है।
जलस्तर बढ़ाने के लिए शुरू की गई है मुहिम
अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि इन कुओं के जरिये भूमिगत जलस्तर भी काफी स्तर तक सुधारा जा सकता है। इसके लिए खत्म कुओं को तैयार करके मॉडल बनाया जाएगा और उसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
इन कुओं को तैयार करने में सरकार को कोई बड़ा बजट भी नहीं लगाना होगा। एडीजी ने बताया कि वह जहां 14 पुलिस एंक्लेव लखनऊ में रहते हैं वहां 1500 वर्गमीटर क्षेत्र में बरसात का पानी इकट्ठा करने को वाटर रिचार्ज कुआं बनाया गया है।
इससे इस क्षेत्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पीएसी की 11 बटालियन झांसी, लखनऊ, बाराबंकी, इटावा, गाजियाबाद और मेरठ में भी रिचार्ज कुएं तैयार कराए गए हैं। दूसरे उन सरकारी महकमों से भी संपर्क किया जा रहा है जिनमें कुएं तैयार करने को जगह है।
इन राज्यों में शुरू की गई है मुहिम
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