अलकायदा के इंडिया चीफ मोहम्मद आसिफ और संभल के जफर मसूद की गिरफ्तारी के बाद संभल पर खुफिया एजेंसियों ने निगाहें गढ़ा दी हैं। आसिफ के संपर्क में आए करीब दस युवकों को रडार पर लिया गया है। आईबी की टीम इन्हें पूछताछ के लिए कभी भी उठा सकती है।
दरअसल संभल का आतंक से नाता करीब दो दशक पहले उस वक्त उजागर हुआ था जब संभल का एक युवक पाकिस्तान जाकर आईएसआई के संपर्क में आ गया था। इसके बाद वर्ष 2002 में जब लालकिला में ब्लास्ट हुआ तो भी संभल के पांच युवकों को खुफिया एजेंसियों ने उठाया था। हालांकि बाद में ये सभी कोर्ट से बरी हो गए थे।
इस बार मोहम्मद आसिफ की गिरफ्तारी और उसके बाद मसूद के पकड़े जाने से संभल फिर से आईबी की रडार पर है। आईबी की टीम ने आसिफ से संपर्क रखने वाले दस लोगों को निगरानी में लिया है। आईबी की एक उच्चस्तरीय टीम संभल में कैंप कर रही है। आईबी की कोशिश है कि पिछले वर्षों में आसिफ से नाता रखने वाले हरेक शख्स को फिल्टर किया जाए।
वेस्ट यूपी में रिव्यू होगा आईबी का सेटअप
आतंकी संगठनों की बढ़ती पैठ को देखते हुए आईबी ने पश्चिमी यूपी में अपने सेटअप की नए सिरे से समीक्षा करने का फैसला किया है।
अभी तक आईबी रेंज मुख्यालयों से ही अपना कामकाज करती रही है। लेकिन जिस तरह से वेस्ट यूपी में आतंकियों की गतिविधियां बढ़ी हैं और यहां स्लीपिंग माड्यूल्स का नेटवर्क खड़ा हुआ है उसने केंद्रीय खुफिया एजेंसी को चौकन्ना कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि आईबी पश्चिमी यूपी में अब जिला मुख्यालयों को छोटे - छोटे कस्बों में भी अपना नेटवर्क खड़ा करेगी।
जिस तेजी से आतंकी संगठन पश्चिमी यूपी में अपनी जड़े जमा रहे हैं उससे खुफिया एजेंसियां परेशान हैं। संभल में अलकायदा की जड़े पैवस्त हो चुकी हैं। आसिफ अकेला नहीं है, उसके पीछे स्लीपिंग सेल्स की पूरी फेहरिस्त है।
छोटे कस्बों में भी खुलेंगी यूनिट
कई युवक ऐसे हैं जिन्हें आईबी मानीटर तो कर रही है लेकिन बिना किसी ठोस सुबूत के हाथ नहीं डालना चाहती। अमरोहा का आतंक से नाता आठ साल पहले ही उजागर हो चुका है। मुरादाबाद में भी आतंकियों के ठहरने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
सलीम पतला तो यहां कई सालों तक पहचान छुपाकर आम लोगों के बीच घुल मिलकर रहता रहा। रामपुर से भी कई युवक आतंकी गतिविधियों में पकड़े जा चुके हैं। बिजनौर हाल ही में आतंकियों के मूवमेंट को लेकर सुर्खियों में रहा था। तेजी से बढ़ती आतंकियों की इन्हीं गतिविधियों ने आईबी की नींद उड़ा दी है।
लोकल इंटेलीजेंस का नेटवर्क धड़ाम
लोकल इंटेलीजेंस का पूरा का पूरा नेटवर्क आतंकियों की टोह लेने के मामले में धड़ाम साबित हुआ है। एलआईयू का मुख्य काम कलेक्ट्रेट पर होने वाले धरना प्रदर्शनों की कवरेज करने तक सिमट गया है। स्थानीय खुफिया एजेंसियों की ढीली वर्किंग भी आतंकी संगठनों को अपना नेटवर्क खड़ा करने का भरपूर मौका दे रही है।