निर्भया कांड के दोषी मुकेश सिंह से इंटरव्यू करने का बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मामले की आंच अब पूर्व गृहमंत्री सुशील शिंदे तक भी पहुंच गई है। बुधवार को इस संबंध में शिंदे से सवाल पूछा गया तो वह भड़क गए।
उनके साथियों ने पत्रकारों से बदसलूकी करते हुए उनके माइक झटक दिए। कुछ लोगों को पत्रकारों से धक्कामुक्की करते हुए भी देखा गया। असल में पत्रकारों ने शिंदे से इस संबंध में सवाल पूछा था कि क्या निर्भया कांड के दोषी मुकेश सिंह से पूछताछ की अनुमति आपके कार्यकाल में दी गई थी।
इस बात को सुनते ही शिंदे भड़क उठे। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी संसद में उनका नाम नहीं लिया फिर आप किस बिना पर यह बात कह रहे हैं। इस पर उनके साथियों ने पत्रकारों से धक्का मुक्की शुरू कर दी।
दिल्ली पुलिस आयुक्त ने कहा इंटरव्यू में कुछ गलत नहीं
दूसरी ओर मामले में दिल्ली पुलिस के रुख से घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा कि उन्हें निर्भया के दोषी के इंटरव्यू में कोई गलत बात नजर नहीं आती। यह इंटरव्यू अगर अनुमति के बाद लिया गया है तो इसमें कुछ भी आपराधिक नहीं है।
बस्सी ने कहा कि जो परमिशन दी गई है वह कानूनन गलत नहीं है। कुछ शर्तों के साथ इंटरव्यू की इजाजत दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि परमिशन क्यों दी गई यह पुलिस की जांच का दायरा नहीं है जांच इस पर होगी कि इंटरव्यू में कुछ गलत प्रक्रिया का पालन तो नहीं किया गया।
वहीं इससे पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी आज संसद में बयान दे चुके हैं कि मामले में इंटरव्यू की अनुमति देने पर वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा मैं इस मामले में व्यक्तिगत रूप से भी आहत हूं।
संसद में जमकर हंगामा, प्रसारण पर रोक जारी रहेगी
इस मुद्दे पर संसद में जमकर हंगामा देखने को मिला। पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए देश के गृहमंत्री सामने आए। उन्होंने पहले राज्यसभा में फिर लोकसभा में इस मुद्दे पर सरकार का जवाब रखा।
दोनों ही सदनों को उन्होंने विश्वास दिलाया कि ये डॉक्यूमेंट्री लोगों को नहीं दिखाई जाएगी। राजनाथ सिंह के मुताबिक इसे प्रसारित नहीं होने दिया जाएगा। मामले पर जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने इस डॉक्युमेंट्री को लेकर कोई इजाजत नहीं दी, इस पर पिछली सरकार ने अनुमति दी थी।
हालांकि यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहे सुशील शिंदे ने इस मुद्दे को सिरे से नकार दिया। उन्होंने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि भले ही डॉक्यूमेंट्री को लेकर 2013 में रजामंदी दी गई हो लेकिन यह मामला उनके संज्ञान में कभी नहीं लाया गया। दूसरी ये मामला न्यायालय में भी पहुंच गया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने भी डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण पर रोक का आदेश जारी किया है।